CG News: नक्सल दहशत से बाहर आया कुतुल कूडूम जलप्रपात, कांकेर में खुली पर्यटन की नई राह
CG News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक में घने जंगलों के बीच मौजूद कुतुल कूडूम जलप्रपात लंबे समय तक बाहरी दुनिया से लगभग अनजान रहा. ग्राम पंचायत आलपरस के जंगलों में स्थित यह जलप्रपात चारों तरफ हरियाली, पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता से घिरा है. लेकिन इलाके में लंबे समय तक रही नक्सल गतिविधियों के कारण आम लोगों और पर्यटकों की यहां पहुंच बेहद मुश्किल रही, जिसके चलते यह खूबसूरत स्थल लोगों की नजरों से दूर रहा.

नक्सल दहशत ने रोक दी थी लोगों की पहुंच
कुतुल कूडूम के आसपास का क्षेत्र कभी नक्सल गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता था. सुरक्षा कारणों और भय के माहौल के चलते स्थानीय लोगों की आवाजाही भी सीमित रही. इसका असर क्षेत्र के विकास के साथ-साथ यहां मौजूद प्राकृतिक स्थलों पर भी पड़ा. खूबसूरत होने के बावजूद कुतुल कूडूम जलप्रपात लंबे समय तक पर्यटकों की पहुंच से बाहर रहा और इसकी प्राकृतिक खूबसूरती जंगलों के बीच ही छिपी रही.
शांति के बाद पहली बार सामने आई जलप्रपात की तस्वीर
मार्च 2026 के बाद बस्तर क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में कमी और शांति बहाली के बीच प्रशासन की पहुंच ऐसे इलाकों तक बढ़ी है. इसी क्रम में कुतुल कूडूम जलप्रपात की तस्वीरें व्यापक रूप से सामने आईं. तस्वीरों में झरने और आसपास के प्राकृतिक नजारों को देखकर लोगों का ध्यान इस अनदेखे पर्यटन स्थल की ओर आकर्षित हुआ. लंबे समय बाद अधिकारी और कर्मचारी भी इस इलाके में पहुंचे और जलप्रपात की खूबसूरती को करीब से देखा.
अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी
कुतुल कूडूम की प्राकृतिक खूबसूरती सामने आने के बाद इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं. यदि यहां सुरक्षित पहुंच मार्ग, आवश्यक सुविधाएं और पर्यटकों के लिए बुनियादी व्यवस्थाएं तैयार की जाती हैं, तो यह स्थल कांकेर के साथ पूरे बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकता है. प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में विकास की संभावनाएं भी मजबूत होती दिखाई दे रही हैं.
नक्सल प्रभावित इलाके में विकास और पर्यटन की नई तस्वीर
कुतुल कूडूम जलप्रपात की सामने आई तस्वीरें सिर्फ एक प्राकृतिक स्थल की खूबसूरती नहीं दिखातीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी भी बताती हैं. जिस क्षेत्र में कभी नक्सल दहशत के कारण पहुंच मुश्किल थी, वहां अब प्रशासन और विकास की गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं. प्राकृतिक संपदा को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं. कुतुल कूडूम इसी बदलाव और नई संभावनाओं का एक उदाहरण बनकर उभर रहा है.

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