CG News: बिलासपुर में भव्य तीजा मिलन समारोह, CM साय ने महिलाओं के साथ साझा की खुशियां
CG News: तीजा तिहार के अवसर पर बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में भव्य तीजा मिलन समारोह का आयोजन किया गया. छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पारंपरिक रंगों से सजे इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताएं-बहनें शामिल हुईं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी समारोह में पहुंचे और महिलाओं के साथ तीजा की खुशियां साझा करते हुए प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं.

लोकपरंपराओं को सहेजने पर CM साय का जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है. इस त्योहार में माताओं-बहनों की आस्था, प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना जुड़ी होती है. उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी बहनों के सुखी और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की. साय ने कहा कि विवाहित बेटियों का मायके आकर परिवार के साथ तीजा मनाना सदियों पुरानी परंपरा है.

महतारी वंदन योजना और लखपति दीदियों का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है. महतारी वंदन योजना के तहत 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 31 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जुड़कर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं.
महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रहा बढ़ावा
CM साय ने कहा कि महिलाएं आधुनिक तकनीक को अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रही हैं. ड्रोन दीदियां तकनीक के जरिए स्वरोजगार से जुड़ रही हैं, वहीं सरकार महिलाओं को उद्यमिता और उद्योगों से जोड़ने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लक्ष्य में मातृशक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी.
गांव का नाम बदलने सहित कई घोषणाएं
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्रवासियों के लिए कई घोषणाएं भी कीं. उन्होंने बिल्हा विकासखंड के चोरहादेवरी गांव का नाम बदलकर ‘रामदेवरी’ करने की घोषणा की. साथ ही माघी पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपये देने का ऐलान किया. समारोह में झूले, मेहंदी, गीत-संगीत और मनोरंजक गतिविधियों ने महिलाओं और बच्चों के बीच उत्साह बढ़ाया, जबकि पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को खास बना दिया.
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