CG News: छत्तीसगढ़ में बाघ-हाथियों के संरक्षण पर फोकस, वन मंत्री ने बताईं ढाई साल की उपलब्धियां
CG News: छत्तीसगढ़ में 35 बाघों और 355 हाथियों के संरक्षण को लेकर वन विभाग विशेष कार्ययोजना तैयार कर रहा है. वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विभाग स्तर पर विशेष योजना पर काम जारी है. इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. विभाग का प्रयास वन्यजीवों के संरक्षण के साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है.

आदिम संस्कृति और हरित विकास पर जोर
वन, जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में आदिम संस्कृति और सांस्कृतिक जैवविविधता के संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार हरित विकास, ग्रामीण कनेक्टिविटी और वन आधारित आजीविका को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के संवर्धन के साथ गांवों तक बेहतर परिवहन सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
572 देवगुड़ियों का निर्माण और पौधरोपण
मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेश सरकार के ढाई साल की विभागीय उपलब्धियां भी साझा कीं. उन्होंने बताया कि बस्तर की आदिम संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए 572 देवगुड़ियों के निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्य किया गया, जिस पर 19 करोड़ 5 लाख रुपये खर्च हुए. वहीं ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बड़े स्तर पर पौधरोपण और पौधों का वितरण किया गया. वर्ष 2024 में निर्धारित लक्ष्य से एक करोड़ अधिक यानी 3 करोड़ 50 लाख पौधों का रोपण एवं वितरण हुआ.
तेंदूपत्ता और वनोपज संग्राहकों को लाभ
प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है, जिसे देश में सर्वाधिक बताया गया है. 7 लाख 14 हजार संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया है, जबकि महिला मुखिया संग्राहकों को 12 लाख 40 हजार जोड़ी चरण पादुका वितरित की गई. विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के तौर पर 12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई. इसके अलावा समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज खरीदी गई और संग्राहकों को 16 करोड़ 66 लाख रुपये का भुगतान किया गया.
425 गांवों में शुरू हुई बस सेवा
परिवहन क्षेत्र में ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 425 नए गांवों तक बस सेवा शुरू की गई है. मंत्री के मुताबिक इससे ग्रामीण इलाकों में आने-जाने की सुविधा बेहतर हुई है. वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से 181 हर्बल उत्पाद भी तैयार किए गए हैं, जिनका मूल्य 4 करोड़ 42 लाख रुपये बताया गया है. वहीं परिवहन विभाग की सेवाओं को डिजिटल करते हुए आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस की होम डिलीवरी की सुविधा भी शुरू की गई है.
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