CG News: प्रधानमंत्री मोदी से मिले CM साय, बस्तर विजन, 10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना और विकास योजनाओं पर हुई बड़ी चर्चा
CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. मुख्यमंत्री ने बस्तर के समग्र विकास का रोडमैप प्रधानमंत्री के सामने रखा और राज्य की कई बड़ी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया.

10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया. उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है और राज्य सरकार की सभी आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी हो चुकी हैं. इस परियोजना के शुरू होने से किसानों को उर्वरक की बेहतर उपलब्धता मिलेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी.
‘बस्तर विजन’ का रखा विस्तृत रोडमैप
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुहिम’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है. इससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि राशन, आयुष्मान भारत, जनधन, वनाधिकार और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं का लाभ अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है.
शिक्षा और स्वास्थ्य में तेजी से बदलाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है. दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है. वहीं मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है. जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और गीदम में मेडिकल कॉलेज के संचालन के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है.
रेल, सड़क और सिंचाई परियोजनाओं पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बस्तर को कभी नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क तेजी से मजबूत हो रहा है. उन्होंने बताया कि 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन का निर्माण जारी है. साथ ही जगदलपुर से हवाई सेवाओं के विस्तार, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण और इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना पर भी चर्चा हुई. इस बैराज से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है.



