CG News: CG-RERA का बड़ा आदेश, रायपुर की ‘वात्सल्य गौरव-1’ परियोजना के प्रमोटर को देना होगा ₹6.87 लाख ब्याज
CG News: छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने रायपुर जिले की एक रियल एस्टेट परियोजना के मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. प्राधिकरण ने सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना के विकास कार्य अधूरे रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं लिए जाने पर प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में 6 लाख 87 हजार 496 रुपए ब्याज का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा, परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक हर महीने 7,314 रुपए ब्याज देने का आदेश भी दिया गया है.

स्वीकृत ले-आउट के अनुसार पूरे नहीं हुए विकास कार्य
प्रकरण की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने पाया कि परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूरे नहीं किए गए हैं. साथ ही सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया. इन परिस्थितियों को देखते हुए परियोजना को अपूर्ण और चालू परियोजना की श्रेणी में माना गया. इसके बाद भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत देरी के लिए ब्याज भुगतान का आदेश पारित किया गया.
वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक देना होगा ब्याज
CG-RERA के आदेश के अनुसार, आबंटी द्वारा जमा की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपए की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से कुल 6 लाख 87 हजार 496 रुपए का भुगतान करना होगा. इसके अतिरिक्त, 1 नवंबर 2026 से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक प्रमोटर को हर महीने 7,314 रुपए ब्याज के रूप में देने होंगे.

बिना रेरा पंजीयन परियोजना विकसित करने पर अलग कार्रवाई
प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले को भी गंभीरता से लिया है. आदेश में कहा गया है कि भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 के तहत निर्धारित पात्रता वाली परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य है. इसके बावजूद पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले में प्रमोटर के विरुद्ध धारा 59 के अंतर्गत अलग प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं.
भूखंड बेचने के बाद भी प्रमोटर की जिम्मेदारी बरकरार
प्राधिकरण के आदेश में यह स्पष्ट संदेश है कि केवल भूखंड बेच देने से प्रमोटर की कानूनी जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जातीं. स्वीकृत ले-आउट के अनुसार सड़क, नाली, बिजली, पेयजल और अन्य जरूरी आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य पूरे करना तथा सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर की जिम्मेदारी है. परियोजना में देरी और निर्धारित नियमों के पालन में कमी होने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

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