CG News: बस्तर का विश्व प्रसिद्ध गोंचा महापर्व संपन्न, बाहुड़ा गोंचा के साथ भगवान जगन्नाथ लौटे श्री मंदिर
CG News: बस्तर का विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गोंचा महापर्व बाहुड़ा गोंचा के साथ श्रद्धा, आस्था और उल्लास के माहौल में संपन्न हो गया. दस दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र भव्य रथों में सवार होकर जनकपुरी से अपने श्री मंदिर लौटे. इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने रथयात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन किए और पूरा जगदलपुर जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठा.

जनकपुरी से श्री मंदिर तक निकली भव्य वापसी रथयात्रा
16 जुलाई से शुरू हुए गोंचा महापर्व के अंतिम दिन बाहुड़ा गोंचा की परंपरा विधिवत निभाई गई. भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र के रथ जनकपुरी से निकले और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्री मंदिर पहुंचे. श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की.
तुपकी की सलामी बनी बस्तर की अनोखी पहचान
गोंचा महापर्व की सबसे खास परंपरा, तुपकी की सलामी, इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही. बांस से बनी तोप जैसी तुपकी से भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक सलामी दी गई. तुपकी की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया. मान्यता है कि पूरे देश में केवल बस्तर में ही भगवान जगन्नाथ को तुपकी से सलामी देने की सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है.
भजन, नृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से गूंजा शहर
वापसी रथयात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की. पूरे मार्ग में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन, लोक नृत्य और भजन-कीर्तन के बीच भगवान का भव्य स्वागत किया गया. श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था पूरे आयोजन में देखने लायक रही.
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है गोंचा महापर्व
बस्तर का गोंचा महापर्व प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व बाहुड़ा गोंचा के साथ विधिवत संपन्न हुआ. इस वर्ष भी महापर्व ने श्रद्धालुओं के मन में आस्था, परंपरा और संस्कृति की अमिट छाप छोड़ दी.
