CG News: बस्तर की लिंगई माता गुफा 23 सितंबर को खुलेगी, संतान सुख की कामना लेकर पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
CG News: बस्तर के फरसगांव क्षेत्र में स्थित लिंगई गट्टा यानी लिंगई माता गुफा आस्था और रहस्य का अनोखा संगम मानी जाती है. ग्राम आलोर और झांटीबंध पारा की पहाड़ी पर मौजूद इस गुफा का प्रवेश द्वार साल में केवल एक दिन कुछ घंटों के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है. इस वर्ष 23 सितंबर 2026, बुधवार को पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद गुफा के द्वार खोले जाएंगे. छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

संतान सुख से जुड़ी है मान्यता
लिंगई माता को स्थानीय लोकविश्वास में संतानदात्री देवी के रूप में विशेष श्रद्धा प्राप्त है. मान्यता है कि करीब एक हजार वर्ष पहले एक पारधी शिकारी खरगोश का पीछा करते हुए इस गुफा तक पहुंचा था, जहां खरगोश अचानक गायब हो गया. इसके बाद इस स्थान को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हुईं. लोककथा के अनुसार, बाद में एक ग्रामीण को स्वप्न में माता के दर्शन हुए और नि:संतान दंपतियों को खीरा या ककड़ी चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई. श्रद्धालु खीरा अर्पित करने के बाद उसे नाखून से चीरकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.

बेहद संकरा है गुफा का रास्ता
लिंगई माता की गुफा फरसगांव से बड़ेडोंगर मार्ग पर करीब 8 किलोमीटर दूर ग्राम आलोर से लगी झांटीबंध पंचायत की पहाड़ी पर स्थित है. बाहर से देखने पर यह विशाल चट्टान जैसी नजर आती है, लेकिन अंदर इसकी संरचना उल्टे कटोरे जैसी दिखाई देती है. गुफा का प्रवेश मार्ग काफी संकरा और सुरंगनुमा है, जिसके कारण श्रद्धालुओं को बैठकर या पेट के बल अंदर जाना पड़ता है. गुफा के भीतर एक समय में करीब 15 से 20 लोग ही बैठ सकते हैं. अंदर प्राकृतिक रूप से बनी करीब डेढ़ से दो फीट ऊंची शिवलिंग जैसी पाषाण आकृति है, जिसे श्रद्धालु लिंगई माता के रूप में पूजते हैं.
पूजा के बाद फिर बंद कर दी जाती है गुफा
लिंगई माता गुफा से जुड़ी परंपराओं में इसे सालभर बंद रखने की मान्यता भी खास है. एक दिवसीय दर्शन और पूजा का आयोजन पूरा होने के बाद गुफा के अंदर फर्श पर बारीक सफेद रेत बिछाई जाती है. इसके बाद भारी पत्थरों से प्रवेश द्वार बंद कर दिया जाता है. मान्यता के अनुसार नवाखानी पर्व के बाद आने वाले पहले बुधवार को ही अगले वर्ष गुफा का द्वार दोबारा खोला जाता है. इस परंपरा के कारण गुफा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक आस्था के साथ रहस्य का आकर्षण भी बना हुआ है.
23 सितंबर के लिए तैयारियां तेज
लिंगई माता के वार्षिक महादर्शन को लेकर मां लिंगेश्वरी सेवा समिति और स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सुरक्षा, पेयजल, छाया, स्वास्थ्य सेवाओं और कतार व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पहाड़ी तक पहुंचने वाले रास्ते को भी बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है. 23 सितंबर को होने वाले इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
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