CG News: सीएम साय के ‘विकसित छत्तीसगढ़‘ में निखर रही गरियाबंद की प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर
CG News: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासतों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी कड़ी में गरियाबंद जिला एक ऐसे केंद्र के रूप में उभरा है, जहाँ प्रकृति का सौंदर्य, आध्यात्मिक शांति और रोमांच का अनूठा संगम देखने को मिलता है। भूतेश्वरनाथ की दिव्यता से लेकर जतमई-घटारानी के मदमस्त झरनों तक, गरियाबंद अब पर्यटकों की पहली पसंद बन चुका है।
विश्व के विशालतम प्राकृतिक शिवलिंग ‘भूतेश्वरनाथ‘
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राज्य के धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास प्राथमिकता पर है। गरियाबंद के ग्राम मरोदा में स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव इसका जीवंत उदाहरण हैं। घने जंगलों के बीच स्थित इस प्राकृतिक शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि इसका आकार हर वर्ष स्वतः बढ़ता है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहाँ उमड़ने वाला जनसैलाब यह बताता है कि यह स्थान न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।

जतमई और घटारानी के दूधिया झरने
राजधानी रायपुर से मात्र 80-90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जतमई और घटारानी क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है। वर्षा ऋतु में यहाँ का सौंदर्य अपनी पूरी भव्यता के साथ निखरता है। ऊँची चट्टानों से गिरते झरने और चारों ओर छाई धुंध ऐसा वातावरण निर्मित करती है, मानो प्रकृति ने स्वयं इस धरा का श्रृंगार किया हो। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में इन पर्यटन क्षेत्रों तक पहुँचने वाले मार्गों को सुगम बनाया गया है, जिससे अब पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है।

उदंती-सीतानदी अभयारण्य की जैव विविधता
प्राकृतिक और वन्यजीव प्रेमियों के लिए उदंती-सीतानदी अभयारण्य एक अनूठा आकर्षण है। यह क्षेत्र दुर्लभ राजकीय पशु ‘जंगली भैंसा’ के संरक्षण के लिए विश्व विख्यात है। साय सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीतियों के कारण यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक समृद्ध हुआ है। यहाँ की शांति और दुर्लभ जीवों की मौजूदगी पर्यटकों को एक अलग ही रोमांचकारी अनुभव प्रदान करती है।

सुगम यात्रा और बढ़ता पर्यटन
गरियाबंद तक पहुँचना अब पहले से कहीं अधिक आसान और सुखद हो गया है। रायपुर से अभनपुर और राजिम होते हुए जाने वाला मार्ग हरियाली से लबालब है। मुख्यमंत्री के विजन के तहत बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) में सुधार होने से अब पर्यटक मात्र 2-3 घंटे में इस प्राकृतिक स्वर्ग तक पहुँच सकते हैं। यहाँ पिकनिक, फोटोग्राफी और ट्रैकिंग के साथ-साथ धार्मिक दर्शन का आनंद एक साथ लिया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान
गरियाबंद जिला आज प्रकृति की सुंदरता, आस्था की गहराई और रोमांच के अद्भुत मेल का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिस तरह से इन पर्यटन स्थलों का संवर्धन किया जा रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के प्रमुख ‘इको-टूरिज्म’ हब के रूप में पहचाना जाएगा। गरियाबंद की यात्रा केवल एक सैर नहीं, बल्कि आत्मा को तरोताजा करने वाला एक संपूर्ण अनुभव है।


