Jashpur News: जशपुर सीएम साय के सुशासन में ‘हर घर जल’ अभियान का सशक्त उदाहरण बना ग्राम बस्तला
Jashpur News: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की प्राथमिकता ‘हर घर जल’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए जशपुर जिले का दुर्गम ग्राम बस्तला (दुलदुला विकासखंड) अब एक प्रेरणादायक मॉडल बन गया है। झारखंड सीमा के समीप घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस गांव में दशकों पुरानी पेयजल की समस्या का अंत हो गया है। जल जीवन मिशन के माध्यम से अब पहाड़ी रास्तों पर पानी के लिए भटकने वाली महिलाओं के जीवन में सुशासन की नई सुबह आई है।
दुर्गम राहें और पुरानी चुनौतियां
भौगोलिक रूप से अत्यंत कठिन परिस्थितियों में स्थित ग्राम बस्तला के निवासियों के लिए पानी लाना किसी जंग से कम नहीं था। महिलाओं और बालिकाओं को कंकरीले रास्तों पर लंबी दूरी तय कर हैंडपंपों, कुओं और झरिया (प्राकृतिक स्रोतों) से पानी लाना पड़ता था। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती थी, जब दूषित और मटमैला पानी पीने के कारण ग्रामीण अक्सर उल्टी-दस्त जैसी जलजनित बीमारियों का शिकार हो जाते थे। इससे न केवल स्वास्थ्य गिरता था, बल्कि गरीब परिवारों पर इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता था।

सीएम साय का विजन
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने इस कठिन क्षेत्र में तकनीकी चुनौतियों को पार करते हुए 10 किलोलीटर क्षमता के उच्च स्तरीय जलागार (ओवरहेड टैंक) का निर्माण किया। इसके साथ ही पूरे गांव में पाइपलाइन का जाल बिछाकर 39 परिवारों को ‘फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन’ (FHTC) से जोड़ा गया। आज बस्तला के हर घर में नल से शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है, जिससे ग्रामीणों को अब अपनी बुनियादी जरूरत के लिए घर से बाहर नहीं निकलना पड़ता।
ग्रामीणों के हाथों में योजना की कमान
योजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए शासन ने इसे केवल सरकारी निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसमें ग्रामीणों को भी भागीदार बनाया। ग्राम स्तर पर ‘जल एवं स्वच्छता समिति’ का गठन किया गया है, जो इस पूरे सिस्टम के रखरखाव की देखरेख करती है। स्थानीय युवाओं को पंप ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे तकनीकी खराबी होने पर तत्काल सुधार सुनिश्चित होता है। इस सामुदायिक स्वामित्व की भावना ने योजना को टिकाऊ और प्रभावी बना दिया है।
बढ़ा स्वास्थ्य का स्तर और बच्चों की शिक्षा
शुद्ध पेयजल पहुँचने से गांव के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। जलजनित बीमारियों में भारी कमी आने से ग्रामीण अब अधिक स्वस्थ और कार्यक्षम हैं। सबसे सुखद प्रभाव बच्चों और महिलाओं पर पड़ा है; पानी लाने में बचने वाले समय का उपयोग महिलाएं अब आयवर्धक गतिविधियों में कर रही हैं। वहीं, बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ी है, क्योंकि अब उन्हें पानी ढोने के काम से मुक्ति मिल गई है। शिक्षा के प्रति उनका रुझान बढ़ना गांव के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
आभार जता रहे ग्रामीण
बस्तला के निवासियों का कहना है कि जल जीवन मिशन ने उनके जीवन को न केवल सरल बल्कि सम्मानजनक भी बना दिया है। ग्रामीणों ने इस कायाकल्प के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच भी विकास की गंगा पहुंचाई जा सकती है। आज बस्तला गांव ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुका है।



