MP News: जीतू पटवारी ने राज्यसभा रेस से खुद को अलग किया, मप्र सरकार पर सीधे निशाना
MP News: भोपाल में कांग्रेस के PCC चीफ जीतू पटवारी ने खुद को राज्यसभा की रेस से अलग कर लिया है। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद पूरी तरह जिम्मेदारी का पद है और इसके कारण उन्हें राज्यसभा की दौड़ में हिस्सा नहीं लेना।
उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह राज्यसभा उम्मीदवार हो सकते हैं, यह पार्टी का निर्णय होगा। इसके अलावा उन्होंने मप्र में महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की गिरावट और महिलाओं के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं में छल के मुद्दे उठाए।
राज्यसभा रेस से अलग और पार्टी निर्णय
जितू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद कामकाज के लिहाज से पूरी तरह जिम्मेदारी वाला है। इसके कारण वह खुद राज्यसभा की दौड़ से अलग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके अलावा कोई भी साथी राज्यसभा जाएगा। मीडिया के सवाल पर उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह राज्यसभा उम्मीदवार हो सकते हैं, यह पार्टी तय करेगी। एमपी में जून में खाली होने वाली राज्यसभा सीट को लेकर अभी अंदरखाने चर्चाएँ और रणनीति चल रही है।
बहनों के लिए लाड़ली बहना योजना पर तीखी टिप्पणी
पटवारी ने कहा कि “लाड़ली बहना” योजना बहनों के साथ छल है। 3 हजार रुपए का वादा करके केवल 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। मप्र में चार करोड़ बहनों में से केवल एक करोड़ को लाभ मिला, जबकि बाकी तीन करोड़ बहनों को छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि महंगाई हर घर के चूल्हे को प्रभावित कर रही है। यह सरकार की धोखाधड़ी और युवाओं के भविष्य पर बोझ डालने वाली नीति है।
बेरोजगारी और शिक्षा पर चिंता
जितू पटवारी ने कहा कि मप्र में बेरोजगारी भयावह स्तर पर है। युवाओं को रोजगार के सपने दिखाए गए, लेकिन अब प्रदेश बेरोजगार युवाओं का गढ़ बन गया है। शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था की गिरावट पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जब वह एजुकेशन मिनिस्टर थे, तब शिक्षकों की प्रशिक्षण प्रणाली चालू थी, लेकिन अब बंद हो गई है। शिक्षकों को एग्जाम के डर से शिक्षा में सुधार करना मुश्किल हो गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिजली चली गई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिजली चली जाने पर जीतू पटवारी ने कहा कि बीजेपी 24 घंटे बिजली देने का वादा करती है, लेकिन हालात इसके विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि बिजली के बिल बढ़ाए जा रहे हैं और बहनों को मात्र 1500 रुपए देने के बाद 3 हजार से ज्यादा का बिल वसूला जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार की असफल नीति और जनता के साथ छल बताया।




