CG News: बस्तर की जंगलों में महिला कमांडो का साहस, 200 से ज्यादा मुठभेड़ों में निभाई अहम भूमिका
CG News: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहे अभियानों में महिला कमांडो अब सुरक्षाबलों की मजबूत ताकत बन चुकी हैं। साल 2006 में सीमित संख्या में भर्ती शुरू हुई थी, लेकिन 2016 के बाद उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर सक्रिय ऑपरेशनों में शामिल किया गया।
विशेष महिला इकाइयां
बस्तर क्षेत्र में महिला कमांडो की कई विशेष इकाइयां काम कर रही हैं। इनमें दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी फाइटर्स, सुकमा की दुर्गा फाइटर्स और सीआरपीएफ की बस्तर फाइटर्स शामिल हैं। वर्तमान में बस्तर संभाग में करीब 2000 से अधिक महिला जवान विभिन्न सुरक्षाबलों में तैनात हैं।
मुठभेड़ों में महत्वपूर्ण योगदान
पिछले सात से आठ वर्षों में महिला कमांडो 200 से ज्यादा माओवादी मुठभेड़ों में शामिल रही हैं। इन अभियानों में 150 से अधिक माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई में उनकी अहम भूमिका रही है। कठिन जंगल, लंबी गश्त और लगातार खतरे के बावजूद महिला जवानों का हौसला कम नहीं होता।
समाज से जुड़ाव भी जिम्मेदारी
महिला कमांडो सिर्फ सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं हैं। वे जंगलों में बसे गांवों में लोगों की मदद भी करती हैं। बीमार ग्रामीणों को दवा पहुंचाना, महिलाओं से संवाद करना और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना भी उनके काम का हिस्सा है, इस बदलाव की एक मिसाल सुंदरी इस्काम हैं, जो कभी माओवादी संगठन से जुड़ी थीं। आज वे दंतेश्वरी फाइटर्स में शामिल होकर सुरक्षा बलों के साथ माओवाद के खिलाफ अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।



