CG News: बस्तर पंडुम 2026 की शुरुआत, लोककला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की बड़ी पहल
CG News: बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो चुका है, इस सांस्कृतिक आयोजन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से लोक कलाकार भाग लेंगे और अपनी पारंपरिक विधाओं का जीवंत प्रदर्शन करेंगे.
बस्तर पंडुम का उद्देश्य
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा आदिवासी परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, इसी कड़ी में बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जनजातीय लोकनृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, नाट्य एवं अन्य पारंपरिक कलाओं को मंच प्रदान करना है.

तीन चरणों में होगा आयोजन
बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा, इसके अंतर्गत ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला एवं संभाग स्तर पर सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जिले की 12 प्रमुख पारंपरिक विधाओं से जुड़े कलाकार इन प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.
प्रथम चरण: जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं
प्रथम चरण में जनपद स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, इसके लिए संबंधित अनुभाग के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर विकासखंडवार कार्यक्रम तय किए गए हैं, निर्धारित तिथियों पर जनपद स्तर पर प्रतियोगिताएं अपने-अपने स्थलों पर आयोजित होंगी.

विजेता दलों को मिलेगा पुरस्कार
प्रथम चरण में प्रत्येक विजेता दल को 10,000 रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी, इसके साथ ही सभी प्रतिभागी दलों को प्रमाण पत्र और फोटो फ्रेम प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया जाएगा.
द्वितीय चरण: जिला स्तरीय आयोजन
बस्तर पंडुम का द्वितीय चरण 24 से 29 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा, इस चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिता होगी, जिसमें प्रत्येक विजेता दल को 20,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी, जिला पंचायत की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय चयन समिति का गठन भी किया जाएगा.
तृतीय चरण: संभाग स्तरीय महोत्सव
बस्तर पंडुम 2026 का तृतीय और अंतिम चरण 6 से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा, इस संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में जिले और संभाग के श्रेष्ठ लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाएंगे.
लोककला को मिलेगा नया जीवन
बस्तर पंडुम 2026 न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह जनजातीय लोककलाओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक सशक्त पहल भी है, इस आयोजन से बस्तर की परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी.



