CG News: सशक्त मानसिकता से आत्मनिर्भरता की ओर, सूरजपुर की महिलाएं पोषण निर्माण में निभा रही अहम भूमिका
CG News: सूरजपुर जिले की महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) ने दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की मिसाल प्रस्तुत की है, ये महिलाएं न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि जिले में माताओं और बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.

पोषण और सशक्तिकरण का संगम
पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) निर्माण संयंत्र सरकार द्वारा संचालित ऐसे केंद्र हैं, जो आंगनवाड़ी और अन्य योजनाओं के तहत गर्भवती महिलाओं, किशोरी बालिकाओं और बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करते हैं, इन्हें महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा चलाया जाता है, इसमें गेहूं, दालें, दूध और अन्य पोषक तत्व शामिल होते हैं, जिससे पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों सुनिश्चित होता है.
स्वादिष्ट और पौष्टिक आहार निर्माण
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए त्वरित उपभोग हेतु पोषण आहार संयंत्रों की स्थापना की गई है, इन संयंत्रों में नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार किया जाता है, जो विटामिन ‘ए’, ‘डी’, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, फोलिक अम्ल, लोह तत्व (आयरन), कैल्शियम और जिंक जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर हैं.
संयंत्रों में महिला भागीदारी
सूरजपुर जिले में कुल 7 पोषण आहार संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर में तीन संयंत्र सक्रिय रूप से संचालन में हैं, इन तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न हैं, तैयार आहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को निःशुल्क प्रदान किया जाता है.
वितरण में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका
भैयाथान विकासखंड में 15 और प्रतापपुर विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, ये समूह कुल 430 महिलाओं के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार का वितरण सुनिश्चित कर रही हैं, इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाएं मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं.
महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण
यह योजना न केवल सूरजपुर जिले में पोषण स्तर सुधारने में सहायक है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करती है, मानसिक रूप से सशक्त और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं अब अपने परिवार और समाज में बदलाव की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.

