CG News: कृषक जीवन ज्योति योजना से किसानों को राहत, 8.41 लाख परिवारों की बदली किस्मत
CG News: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कभी बिजली बिल और कभी सिंचाई खर्च चिंता का कारण हुआ करता था, लेकिन अब ये परेशानियां बीते दिनों की बात बन चुकी हैं, राज्य सरकार की कृषक जीवन ज्योति योजना ने खेती की लागत को कम कर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

कृषि पंपों को निःशुल्क और रियायती बिजली
योजना के तहत 5 अश्वशक्ति तक के कृषि पंपों को निःशुल्क और रियायती बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, 3 अश्वशक्ति तक के पंपों को सालाना 6000 यूनिट और 3 से 5 अश्वशक्ति के पंपों को 7500 यूनिट तक बिजली बिल में छूट दी जा रही है, बिजली खर्च में राहत मिलने से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ रहा है, इससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हो पाई है और कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है.
फ्लैट रेट विकल्प बना किसानों की पसंद
योजना की एक विशेष सुविधा फ्लैट रेट विकल्प है, जिसमें बिजली खपत की कोई सीमा नहीं होती, इस विकल्प को चुनने वाले किसानों को केवल 100 रुपये प्रति अश्वशक्ति प्रति माह की दर से भुगतान करना होता है, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को अतिरिक्त राहत दी गई है.

सरकार का मजबूत आर्थिक समर्थन
राज्य सरकार ने बीते दो वर्षों में इस योजना के लिए लगभग 13,523 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया है, वर्तमान में प्रदेश के 8 लाख 41 हजार से अधिक कृषि पंप उपभोक्ता इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, वर्ष 2025-26 के लिए भी 3500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है.
अतिरिक्त पंपों के लिए भी सरल दरें
कृषि की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए द्वितीय और अतिरिक्त कृषि पंपों के लिए भी किफायती दरें तय की गई हैं, 5 अश्वशक्ति तक के दूसरे पंप के लिए 200 रुपये प्रति अश्वशक्ति प्रतिमाह और तीसरे व अन्य पंपों के लिए 300 रुपये प्रति अश्वशक्ति प्रतिमाह की व्यवस्था की गई है.
आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनी योजना
किसानों का कहना है कि, पहले बिजली बिल के कारण खेती घाटे का सौदा लगती थी, लेकिन अब निःशुल्क बिजली से सिंचाई आसान हो गई है, बची हुई राशि से वे बीज, खाद और आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश कर पा रहे हैं, कृषक जीवन ज्योति योजना ने यह सिद्ध कर दिया है कि, सही नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है, आज छत्तीसगढ़ के खेत न सिर्फ फसल उगा रहे हैं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी भी लिख रहे हैं.



