श्री रामलला दर्शन योजना: छत्तीसगढ़ में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए रामलला के दर्शन, सरकार उठा रही तीर्थयात्रा का पूरा खर्च
श्री रामलला दर्शन योजना: छत्तीसगढ़ शासन की श्री रामलला दर्शन योजना प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम और काशी विश्वनाथ के दर्शन कराने में मददगार साबित हो रही है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं. योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और बुजुर्गों को भी अपनी वर्षों पुरानी धार्मिक अभिलाषा पूरी करने का अवसर मिल रहा है.
![]()
2024 में शुरू हुई थी श्री रामलला दर्शन योजना
छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है. इसी धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्री रामलला दर्शन योजना शुरू की. योजना का शुभारंभ 5 मार्च 2024 को रायपुर संभाग से पहली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया गया था. इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों से श्रद्धालुओं के जत्थे अयोध्या धाम के लिए रवाना होते रहे हैं.
योजना के तहत राज्य सरकार ने हर साल लगभग 20 हजार नागरिकों को तीर्थयात्रा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है. यात्रा की व्यवस्थाओं के लिए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC), रेलवे, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के बीच समन्वय किया जाता है. श्रद्धालुओं को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विशेष ट्रेनों और बसों से यात्रा कराई जाती है.
![]()
जशपुर से अब तक 3 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
श्री रामलला दर्शन योजना के तहत जशपुर जिले के 3,062 से अधिक श्रद्धालु अब तक अयोध्या धाम पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं. योजना के 16वें चरण में जिले के विभिन्न जनपद पंचायतों और नगर पंचायतों से 204 श्रद्धालुओं को अयोध्या भेजने की व्यवस्था की गई. इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष गंगाराम भगत और नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, इससे पहले 5 अगस्त को योजना के 14वें चरण में जशपुर जिले के 204 श्रद्धालुओं का जत्था अयोध्या के लिए रवाना हुआ था. उस समय जिले से 2,856 से अधिक श्रद्धालु योजना का लाभ उठा चुके थे. इन यात्राओं के माध्यम से जिले के जरूरतमंद और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को बिना यात्रा खर्च की चिंता किए रामलला के दर्शन का अवसर मिला.
बिलासपुर और रायपुर से भी विशेष ट्रेनें रवाना
21 अक्टूबर को बिलासपुर रेलवे स्टेशन से बिलासपुर संभाग के विभिन्न जिलों के 850 श्रद्धालुओं को लेकर विशेष ट्रेन अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई. ट्रेन को जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद कमलेश जांगड़े, बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक और जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने हरी झंडी दिखाई. कार्यक्रम में जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, रेलवे और IRCTC के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे, इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन के साथ वाराणसी स्थित बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन का अवसर भी दिया गया. इससे पहले 19 अगस्त को रायपुर रेलवे स्टेशन से 850 श्रद्धालुओं को लेकर विशेष ट्रेन रवाना हुई थी. इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धालुओं को यात्रा की शुभकामनाएं दीं.

सरकार उठाती है यात्रा, भोजन और ठहरने का खर्च
योजना की प्रमुख विशेषता यह है कि चयनित श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं का खर्च छत्तीसगढ़ शासन वहन करता है. इसमें निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बस और विशेष ट्रेन से आवागमन, भोजन, नाश्ता, ठहरने की व्यवस्था और दर्शन स्थलों तक स्थानीय परिवहन जैसी सुविधाएं शामिल हैं. यात्रा के दौरान जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, इन व्यवस्थाओं से ऐसे लोगों को भी तीर्थयात्रा का अवसर मिल रहा है, जिनके लिए आर्थिक तंगी, उम्र या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अयोध्या और काशी जाना मुश्किल था. योजना के लाभार्थियों ने यात्रा के दौरान मिली सुविधाओं पर संतोष जताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है.
बुजुर्ग श्रद्धालुओं का वर्षों पुराना सपना हुआ पूरा
कबीरधाम जिले के ग्राम खारा निवासी 69 वर्षीय शोभनाथ सोनवानी के लिए अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला और वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करना लंबे समय से सपना था. आर्थिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के कारण उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही थी. योजना के तहत चयनित होने के बाद उन्हें निःशुल्क तीर्थयात्रा का अवसर मिला, शोभनाथ सोनवानी के अनुसार, कबीरधाम से दुर्ग रेलवे स्टेशन तक बस की व्यवस्था की गई और वहां से विशेष ट्रेन के माध्यम से अयोध्या और काशी ले जाया गया. यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ता, चाय, चिकित्सकीय सहायता, भजन-कीर्तन और दर्शन स्थलों तक परिवहन की सुविधा मिली. उन्होंने बताया कि व्यवस्थित यात्रा के कारण उनकी वर्षों पुरानी धार्मिक अभिलाषा पूरी हो सकी, इसी तरह कबीरधाम जिले के ग्राम बबई निवासी डोमन साहू और उनकी पत्नी पार्वती साहू को भी योजना के माध्यम से रामलला के दर्शन करने का अवसर मिला. दंपती ने अयोध्या के साथ वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में भी दर्शन किए. इस जत्थे में कबीरधाम जिले के 71 श्रद्धालु शामिल थे. कवर्धा से दुर्ग रेलवे स्टेशन तक निःशुल्क बस परिवहन की व्यवस्था की गई थी. यात्रा के दौरान खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं.
योजना का लाभ लेने से पहले जान लें पात्रता
योजना के लिए उपलब्ध विवरण के अनुसार, आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना जरूरी है. पात्रता संबंधी जानकारी में 18 से 75 वर्ष की आयु सीमा, जीवनकाल में एक बार यात्रा का लाभ और यात्रा से पहले निर्धारित स्वास्थ्य जांच जैसी शर्तों का उल्लेख मिलता है. प्रारंभिक चरण में 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को प्राथमिकता देने का प्रावधान भी बताया गया है, इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कोटा, शासकीय सेवा में कार्यरत व्यक्तियों के लिए अपात्रता तथा 65 वर्ष से अधिक आयु के कुछ अकेले यात्रियों के लिए सहायक की व्यवस्था संबंधी नियमों का भी उल्लेख किया गया है. हालांकि, पात्रता, आयु सीमा, कोटा और सहायक से जुड़े नियमों में बदलाव संभव है. इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित जिला प्रशासन या पर्यटन विभाग से मौजूदा दिशा-निर्देशों की पुष्टि करना जरूरी है, श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के श्रद्धालु अयोध्या और काशी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच पा रहे हैं. विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और बुजुर्गों के लिए सरकार की ओर से की जा रही यात्रा व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है. योजना से जुड़ी यात्राओं और लाभार्थियों के अनुभवों के जरिए प्रदेशवासियों की वर्षों पुरानी धार्मिक इच्छाएं पूरी हो रही हैं.
