Special Story: राजनांदगांव के मां भानेश्वरी मंदिर की अनोखी परंपरा, जंवारा बोने से ज्योति कलश विसर्जन तक पुरुषों की भूमिका
Special Story: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के ग्राम सिंघोला में स्थित मां भानेश्वरी मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां नवरात्रि का आयोजन सामान्य मंदिरों से कुछ अलग तरीके से किया जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में मांगी गई मुराद पूरी होती है. संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती भी यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं. इस मंदिर की खास पहचान यह है कि नवरात्रि की शुरुआत तिथि के बजाय वार के हिसाब से तय होती है और जंवारा बोने से लेकर ज्योति कलश विसर्जन तक पुरुष विशेष भूमिका निभाते हैं.

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मां भानेश्वरी मंदिर
सिंघोला का मां भानेश्वरी मंदिर राजनांदगांव और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है. मंदिर में पूजा-पाठ, ज्योति कलश स्थापना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भक्तिमय माहौल बना रहता है. मंदिर के पास तालाब के बीच बना मां दुर्गा का मंदिर भी लोगों को आकर्षित करता है.
तिथि नहीं, वार के अनुसार शुरू होता है पर्व
आमतौर पर नवरात्रि की शुरुआत हिंदू पंचांग की तिथि के आधार पर होती है, लेकिन सिंघोला के इस मंदिर में परंपरा अलग है. यहां नवरात्रि के नौ दिन पूरे करने के लिए वार के अनुसार पर्व की शुरुआत तय की जाती है. तिथि में घट-बढ़ होने पर भी नौ दिनों तक नवरात्रि मनाने की परंपरा का पालन किया जाता है.
इस मंदिर में जंवारा बोने की जिम्मेदारी भी पुरुष निभाते हैं. वहीं पर्व के समापन पर ज्योति कलश विसर्जन के दौरान कलश उठाने की परंपरा भी पुरुषों से जुड़ी है. इन रीति-रिवाजों के कारण मां भानेश्वरी मंदिर की नवरात्रि का आयोजन अलग पहचान रखता है.
भानुमति से मां भानेश्वरी तक की मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, मां भानेश्वरी का जन्म 9 मई 1911 को भानुमति के रूप में हुआ था. कहा जाता है कि किशोरावस्था में उनके जीवन से जुड़ी कुछ घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने उन्हें देवी स्वरूप मानकर पूजना शुरू कर दिया. मान्यता के अनुसार, 3 नवंबर 1975 को उन्होंने सिंघोला में समाधि ली, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण हुआ. आज श्रद्धालु इस स्थान को सिद्धपीठ के रूप में मानते हैं.
मनोकामना पूरी होने की आस्था से पहुंचते हैं भक्त
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां भानेश्वरी के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनोकामना पूरी होती है. विशेष रूप से संतान की कामना रखने वाले दंपती यहां पहुंचकर माता का आशीर्वाद लेते हैं. नवरात्रि के दौरान दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ जाती है और मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठता है.
लोकपरंपरा और धार्मिक विश्वास की अनूठी पहचान
मां भानेश्वरी मंदिर की पहचान केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है. यहां पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं और नवरात्रि मनाने का विशिष्ट तरीका स्थानीय संस्कृति और लोकआस्था को दर्शाता है. यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान राजनांदगांव के सिंघोला स्थित इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं.
