CG News: बेमेतरा में प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन का भव्य आयोजन, छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य के संरक्षण पर होगा मंथन
CG News: छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित दो दिवसीय प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन 26 और 27 सितंबर को बेमेतरा जिले में किया जा रहा है. इस राज्यस्तरीय आयोजन में प्रदेश भर के प्रख्यात साहित्यकार, भाषाविद्, विद्वान और राजभाषा से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार और राज्य की समृद्ध साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाना है.

राजभाषा आयोग अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने मुख्यमंत्री साय से की भेंट
सम्मेलन के आयोजन से पूर्व छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) प्रभात मिश्रा ने रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को बेमेतरा में आयोजित होने वाले प्रांतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का सादर निमंत्रण दिया. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को कार्यक्रम की रूपरेखा और तैयारियों से अवगत कराया.
मुख्यमंत्री साय ने दी अग्रिम शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन के आयोजन के लिए अध्यक्ष प्रभात मिश्रा और राजभाषा आयोग की पूरी टीम को बधाई दी. मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ी भाषा और लोक संस्कृति के उत्थान में एक मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों से स्थानीय भाषा और लोक साहित्य को नया प्रोत्साहन मिलता है.
भाषा, साहित्य और नई पीढ़ी से जुड़ाव
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रशासनिक उपयोग, साहित्य विकास और नई पीढ़ी में मातृभाषा के प्रति रुचि बढ़ाने जैसे विषयों पर गहन संवाद होगा. इसके अलावा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोककथाओं और सांस्कृतिक चेतना को संजोने पर विद्वान अपने विचार साझा करेंगे. इससे क्षेत्रीय रचनाकारों और शोधकर्ताओं को भी नई दिशा मिलेगी.
प्रदेश भर से पहुंचेंगे साहित्यकार और भाषा प्रेमी
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में राज्य के सभी जिलों से कवि, लेखक, शोधार्थी और भाषा प्रेमी भाग ले रहे हैं. यह आयोजन छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं तथा विचारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का काम करेगा. इस साझा मंच से छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और पहचान को अधिक सशक्त और गौरवशाली बनाने के संकल्प को गति मिलेगी.

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