CG News: इस बार एक ही दिन मनेंगे हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी, सुबह गणेश स्थापना तो शाम को शिव-पार्वती की पूजा
CG News: देश के प्रमुख पंचांगों की गणना के अनुसार, इस वर्ष हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा. सामान्य तौर पर हरतालिका तीज के अगले दिन गणेश चतुर्थी आती है, लेकिन इस बार तिथियों के विशेष संयोग के कारण दोनों त्योहार एक साथ पड़ रहे हैं. ऐसे में सुबह श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे, जबकि शाम को सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी.

तिथियों के संयोग से बनी स्थिति
पंडितों के अनुसार, तृतीया तिथि के विस्तार और उसी दिन मध्याह्न के समय चतुर्थी तिथि के शुरू होने के कारण यह स्थिति बनी है. भारतीय पंचांग परंपरा में गणेश स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष शुभ माना जाता है. वहीं हरतालिका तीज का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा के साथ मुख्य रूप से संपन्न होता है. दोनों पर्वों के पूजा काल अलग होने के कारण एक ही दिन इनके आयोजन में कोई बाधा नहीं आएगी.
पंचांगों में भी एक जैसी गणना
नीमच के निर्णय सागर पंचांग, जबलपुर के बाबूलाल भुवन विजय पंचांग, बनारस के ऋषिकेश पंचांग और रायपुर के देव पंचांग में भी इस बार तिथियों का यही संयोग बताया गया है. पंचांगों के अनुसार, तृतीया और चतुर्थी के समय चक्र के मेल के चलते दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे. प्रदेश में हरतालिका तीज के लिए 14 सितंबर को शासकीय अवकाश निर्धारित है, जबकि गणेश चतुर्थी का वैकल्पिक अवकाश भी इसी तारीख को रखा गया है.
सुबह गणेश स्थापना, शाम को तीज पूजा
श्रद्धालु शुभ मुहूर्त और मध्याह्न काल में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें मोदक का भोग लगा सकते हैं. दूसरी ओर, हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, कथा और आरती करेंगी. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दोनों पर्वों की पूजा का समय अलग निर्धारित होने के कारण व्रती महिलाओं को तिथि को लेकर किसी तरह के भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है.
भक्ति के दोहरे उल्लास का माहौल
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का यह विशेष संयोग इस बार श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहने वाला है. सुबह घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की स्थापना के साथ गजानन के जयकारे सुनाई देंगे, वहीं शाम को शिव-पार्वती की आराधना और भजनों से वातावरण भक्तिमय होगा. एक ही दिन दो प्रमुख पर्व होने से धार्मिक स्थलों के साथ लोगों के घरों में भी सुबह से देर रात तक उत्सव और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिलेगा.
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