CG News: चित्रकोट से फिल्म सिटी तक, छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने की बड़ी तैयारी
CG News: नवा रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेश में पर्यटन, धार्मिक स्थलों और संस्कृति को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बस्तर के चित्रकोट के पास करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से टेंट सिटी विकसित करने की योजना है. चित्रकोट को भारत सरकार की ‘वन स्टेट वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ पहल के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी है, वहीं स्थानीय युवाओं को पर्यटन से रोजगार से जोड़ने के लिए गाइड ट्रेनिंग भी कराई गई है.

होमस्टे और फिल्म सिटी पर जोर
प्रदेश में होमस्टे पॉलिसी 2025-30 के तहत सात जिलों के 85 लोगों का चयन किया गया है. इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने के साथ लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है. वहीं नवा रायपुर में करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से फिल्म सिटी का निर्माण चल रहा है. छत्तीसगढ़ में फिल्मों की शूटिंग और निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सब्सिडी की योजना पर भी काम किया जा रहा है.

धार्मिक पर्यटन का बढ़ेगा दायरा
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अगले चरण में 31 स्थानों का चयन किया गया है. सरकार की योजना इन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर पर्यटन का विस्तार करने की है. इसके साथ ही कलाकारों के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. पिछले ढाई वर्षों में कलाकार कल्याण कोष, लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना और वरिष्ठ कलाकार-साहित्यकारों की सहायता के तहत लाखों रुपये की मदद दी गई है.
तीजन बाई के नाम पर राज्य अलंकरण
पंडवानी की प्रसिद्ध कलाकार पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के सम्मान में राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की गई है. सरकार का कहना है कि प्रदेश के कलाकारों को केवल मंच उपलब्ध कराना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मान और आर्थिक सहयोग देकर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को देशभर में पहचान दिलाना भी प्राथमिकता है. इस दिशा में कलाकार कल्याण से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है.
सिरपुर को विश्व धरोहर बनाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी काम जारी है. सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की पहल की जा रही है, जबकि पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो की योजना पर काम चल रहा है. पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण के साथ आरंग के रीवा स्थित मुक्तिकागढ़ में पुरातात्विक उत्खनन से करीब 2,750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण सामने आए हैं. इन प्रयासों से पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है.
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