CG News: कांगेर घाटी से गुजरने वाली NH-30 का होगा विस्तार, अंतिम वन स्वीकृति के लिए भेजा प्रस्ताव
CG News: बस्तर में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से गुजरने वाले NH-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है. परियोजना के लिए 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग को पहले चरण में सशर्त सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और अब अंतिम वन स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है.

जगदलपुर-सुकमा-कोंटा मार्ग को मिलेगा फायदा
यह परियोजना NH-30 के किलोमीटर 25.530 से 31.540 के बीच प्रस्तावित है, जो जगदलपुर-सुकमा-कोंटा मार्ग का हिस्सा है. सड़क के उन्नयन से बस्तर के दक्षिणी इलाकों में लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है. साथ ही इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच को भी मजबूती मिल सकती है.
वन भूमि और क्षतिपूरक वनीकरण की प्रक्रिया पूरी
परियोजना को अक्टूबर 2025 में प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति मिली थी. इसके बाद वन एवं पर्यावरण से जुड़ी शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई. वन भूमि के उपयोग के बदले क्षतिपूरक वनीकरण और अतिरिक्त क्षतिपूरक वनीकरण की निर्धारित राशि भी जमा की जा चुकी है. हालांकि स्थायी निर्माण और सड़क की ब्लैक टॉपिंग का काम अंतिम वन स्वीकृति मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकेगा.
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की महत्वपूर्ण प्राकृतिक और जैव-विविधता वाली धरोहर है. इसलिए सड़क परियोजना को आगे बढ़ाते समय वन, वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़े नियमों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर में विकास और बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है.
पर्यटन और कारोबार को मिल सकता है बढ़ावा
NH-30 के इस हिस्से के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से स्थानीय लोगों के साथ यात्रियों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है. सड़क संपर्क मजबूत होने से प्रशासनिक पहुंच, स्थानीय कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है. कांगेर घाटी सहित बस्तर के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा मिलने की संभावना है. अब अंतिम वन स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है.
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