CG News: रायपुर में सरेंडर नक्सली महिलाओं ने किया रैंप वॉक, बंदूक छोड़ थामा हुनर और आत्मनिर्भरता का रास्ता
CG News: रायपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन और स्वदेशी एक्सपो में एक अनोखा नजारा देखने को मिला, यहां सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट चुकी महिला नक्सलियों ने रैंप वॉक किया, महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा साड़ी और हैंडलूम से तैयार परिधानों को पहनकर रैंप पर अपनी प्रस्तुति दी, उनके आत्मविश्वास और उत्साह ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा, यह आयोजन बदलते बस्तर की एक नई तस्वीर पेश करता नजर आया.

रैंप वॉक से दिया शांति का संदेश
स्वदेशी फैशन शो में आत्मसमर्पित महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया, उन्होंने कोसा सिल्क और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनाई से तैयार आकर्षक परिधानों का प्रदर्शन किया, इन महिलाओं ने अपने अंदाज में यह संदेश दिया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के बाद सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ नई जिंदगी शुरू की जा सकती है, कभी बंदूक और हिंसा के बीच जीवन बिताने वाली इन महिलाओं का रैंप पर नजर आना बदलाव की कहानी बन गया.

पहली बार रायपुर पहुंचीं कई महिलाएं
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि रैंप वॉक में शामिल लगभग सभी महिलाएं पहली बार रायपुर पहुंची थीं, उनके लिए यह अनुभव बेहद खास और यादगार रहा, पारंपरिक परिधानों में रैंप पर कदम रखते समय महिलाओं के चेहरे पर आत्मविश्वास और उत्साह साफ दिखाई दिया, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी आत्मसमर्पित महिलाओं से मुलाकात कर बातचीत की, उन्होंने महिलाओं का उत्साह बढ़ाया और उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं.
कोशल फैब ब्रांड की हुई शुरुआत
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया, इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड कोशल फैब का शुभारंभ किया, सरकार का लक्ष्य प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों और उनके उत्पादों को नई पहचान देना है, साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना है.
बंदूक की जगह हुनर की नई पहचान
रैंप पर कोसा सिल्क पहनकर उतरीं इन महिलाओं ने एक तरफ छत्तीसगढ़ की समृद्ध हथकरघा परंपरा को सामने रखा, वहीं दूसरी तरफ बदलते बस्तर की कहानी भी दिखाई, जहां कभी हिंसा और बंदूक का प्रभाव था, वहां अब हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता की तस्वीर सामने आ रही है, इन महिलाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि पुनर्वास और नए अवसरों के जरिए मुख्यधारा में लौटे लोग अपनी नई पहचान बना सकते हैं और सम्मान के साथ बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं.
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