CG News: दिल्ली के बड़े मंच पर बिखरी छत्तीसगढ़ी लोककला की छटा, पंडवानी ने जीता दर्शकों का दिल
CG News: छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी ने राजधानी दिल्ली में आयोजित एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपनी अलग पहचान बनाई. इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित लोक संगीत सम्मेलन की शुरुआत छत्तीसगढ़ की इसी लोक शैली की प्रस्तुति से हुई. कार्यक्रम को प्रसिद्ध पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण सम्मान से नवाजी गईं स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित किया गया था.

महाभारत की गाथाओं का हुआ मंचन
कार्यक्रम में पंडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक वाद्य कलाकारों के साथ प्रस्तुति दी. महाभारत की कथाओं को गायन, संवाद, अभिनय और संगीत के जरिए पेश किया गया. प्रस्तुति के दौरान दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, कथा शैली और संगीत की समृद्ध विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला.

तीजन बाई की विरासत को किया याद
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य तीजन बाई के योगदान को याद करना भी रहा. उन्होंने पंडवानी को छत्तीसगढ़ के गांवों से निकालकर देश और विदेश के बड़े सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया. उनकी प्रस्तुति शैली ने इस लोककला को व्यापक पहचान दिलाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी विरासत को मजबूत किया.
लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर
आयोजन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की लोककलाओं में सदियों पुरानी कहानियां, परंपराएं और सामाजिक जीवन की झलक मौजूद है. ऐसे मंच इन परंपराओं को नए दर्शकों से जोड़ने का काम करते हैं. सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोक कलाओं को प्रस्तुत किया जा रहा है. कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से जुड़े जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र के लोगों की मौजूदगी रही. दिल्ली में हुई इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर एक बार फिर मजबूती से स्थापित किया.



