CG News: लोक आस्था और संस्कृति का अनोखा पर्व, उमरगांव में श्रद्धा से निभाई जाती है जुड़वास की परंपरा
CG News: छत्तीसगढ़ की धरती अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखती है, आधुनिकता के दौर में भी यहां के गांवों में कई ऐसे लोकपर्व आज भी जीवित हैं, जो आस्था के साथ प्रकृति, ग्रामीण जीवन और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं, धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र का ग्राम उमरगांव भी ऐसी ही एक अनोखी परंपरा को संजोए हुए है, जहां सदियों पुरानी माता पहुंचानी यानी जुड़वास की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है,

भक्ति और आस्था के साथ निकली माता पहुंचानी यात्रा
धमतरी जिले के नगरी विकासखंड से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित उमरगांव में 13 जुलाई को माता पहुंचानी यानी जुड़वास लोकपर्व धूमधाम से मनाया गया, इस मौके पर ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए, शीतला माता पुजारी के साथ ग्रामीण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर माता सेवा गीत गाते हुए माता तालाब स्थित शीतला माता के दरबार तक पहुंचे, माता के दरबार में पहुंचकर ग्रामीणों ने विधि विधान से पूजा अर्चना की, माता को नारियल, फल, फूल, चीला रोटी और नीम की पत्तियां अर्पित की गईं, लोगों ने गांव की सुख समृद्धि, अच्छी बारिश और रोगों से मुक्ति की कामना की, ढोल नगाड़ों की आवाज और माता के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में बदल गया,
बीमारियों से बचाव की कामना से जुड़ी परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार, पुराने समय में जब गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं, तब गर्मी के मौसम के बाद चेचक, हैजा और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता था, ऐसे समय में ग्रामीण शीतला माता की पूजा कर गांव और लोगों की सुरक्षा की प्रार्थना करते थे, लोक मान्यता के अनुसार, इसी श्रद्धा और विश्वास से माता पहुंचानी की परंपरा शुरू हुईकई इलाकों में इस परंपरा को जुड़वास के नाम से भी जाना जाता है, जुड़ यानी शीतलता का प्रतीक माना जाता है, गर्मी के बाद बारिश के आगमन, अच्छी फसल, गांव की खुशहाली और प्राकृतिक संतुलन की कामना के साथ यह पर्व मनाया जाता है,
लोक विरासत को सहेज रहा है उमरगांव
,लो क विशेषज्ञों के अनुसार, माता पहुंचानी पर्व से जुड़ी कोई एक निश्चित पौराणिक कथा नहीं मिलती है, यह छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और ग्रामीण परंपराओं से जुड़ा आयोजन है, जिसका मुख्य उद्देश्य गांव की सुरक्षा, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को बनाए रखना है, आज के आधुनिक समय में भी उमरगांव की माता पहुंचानी परंपरा छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और लोक विरासत का जीवंत उदाहरण बनी हुई है, यह पर्व सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ाने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का माध्यम भी है,
