CG News: छत्तीसगढ़ में मातृभाषा आधारित शिक्षा की शुरुआत, जशपुर के 202 स्कूलों में सादरी भाषा से पढ़ेंगे पहली-दूसरी के छात्र
CG News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छत्तीसगढ़ में मातृभाषा आधारित शिक्षा की शुरुआत जशपुर जिले से कर दी गई है. नए शैक्षणिक सत्र से कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के 202 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों को सादरी भाषा के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी. इस पहल का उद्देश्य बच्चों की शुरुआती शिक्षा को आसान, प्रभावी और उनकी स्थानीय भाषा से जोड़ना है.
बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, एससीईआरटी, के नेतृत्व में ‘नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम’ शुरू किया गया है. इस कार्यक्रम का संचालन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, डाइट जशपुर, के मार्गदर्शन में लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा किया जाएगा. कार्यक्रम के तहत बच्चों को उनकी मातृभाषा में सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे पढ़ाई को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा.
द्विभाषी पाठ्यपुस्तकों से होगी पढ़ाई
नई व्यवस्था के तहत बस्तर, सरगुजा और जशपुर संभाग के कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों के लिए स्थानीय भाषाओं और हिंदी में द्विभाषी पाठ्यपुस्तकें तैयार की गई हैं. इन पुस्तकों में स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, परिवेश और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरण शामिल किए गए हैं, ताकि बच्चे अपनी भाषा और सामाजिक वातावरण से जुड़े रहते हुए शिक्षा प्राप्त कर सकें.
बच्चों की सीखने की क्षमता होगी मजबूत
शिक्षा विभाग का मानना है कि मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा मिलने से बच्चों की विषयों पर समझ बेहतर होगी, सीखने की गति तेज होगी और कक्षा में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी. इससे बच्चों के लिए पढ़ाई अधिक सहज और रुचिकर बनेगी, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में पढ़ाई से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, सीखने की प्रक्रिया आसान होती है और स्कूल छोड़ने की संभावना भी कम हो जाती है. यही कारण है कि स्थानीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की इस पहल को प्रदेश में भविष्य की महत्वपूर्ण शैक्षणिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
एससीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने पर विशेष जोर दिया गया है. नीति के अनुसार जहां संभव हो, कम से कम कक्षा पांचवीं तक बच्चों को उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने का प्रयास किया जाना चाहिए. इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार चरणबद्ध तरीके से बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम का विस्तार कर रही है.
