CG News: छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026: सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक संतुलन और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
CG News: छत्तीसगढ़ में पारित धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 राज्य की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कानून धर्मांतरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ती संवेदनशीलता पर फोकस
बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़ी घटनाओं को देखते हुए सरकार का मानना है कि कई मामलों में यह प्रक्रिया दबाव, प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से हो रही है। इसी कारण मौजूदा कानून को अधिक सख्त और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
![]()
सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
नए अधिनियम के तहत अवैध धर्मांतरण पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और 1 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है और जुर्माना 25 लाख रुपये तक हो सकता है, नाबालिगों, महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लोगों के धर्मांतरण के मामलों में 10 से 20 वर्ष तक की सजा और कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है, जिससे कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पारदर्शी प्रक्रिया और नोटिस सिस्टम
कानून के अनुसार धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन की पूर्व सूचना और 21 दिनों के भीतर रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। साथ ही यह जिम्मेदारी धर्मांतरण कराने वाले पर होगी कि वह यह साबित करे कि प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक थी, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को भी इस कानून के दायरे में शामिल किया गया है। विवाह के आधार पर धर्म परिवर्तन को भी तय प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध माना जाएगा।
सामाजिक संतुलन और संरक्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अधिनियम को सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया है। उनका मानना है कि यह कानून कमजोर वर्गों की रक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में सहायक होगा, स्व. दिलीप सिंह जूदेव के धर्मांतरण विरोधी जनजागरण को इस कानून की प्रेरणा बताया गया है। साथ ही कुछ स्थानीय घटनाओं को सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्रशासनिक व्यवस्था और तेज न्याय प्रक्रिया
इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप-निरीक्षक स्तर के अधिकारी करेंगे और विशेष न्यायालयों में 6 महीने के भीतर निर्णय देना अनिवार्य होगा। साथ ही धर्मांतरण संबंधी सूचनाएं सार्वजनिक की जा सकेंगी।

