CG News: CM साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट को दिखाई हरी झंडी, स्वास्थ्य सेवाओं की नई शुरुआत
CG News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के अंतर्गत 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को नवा रायपुर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मंत्रिमंडल सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे.

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान
मोबाइल मेडिकल यूनिटों का संचालन विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए किया जाएगा, इससे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों को अस्पताल जाने में होने वाली कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी, इस पहल से छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदायों को स्वास्थ्य सेवाओं में समान अवसर मिलेंगे और प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार होगा.
2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों में सेवाएँ
इन 57 यूनिटों के माध्यम से प्रदेश के 18 जिलों के 2100+ गाँवों और बसाहटों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचेंगी, लगभग 2 लाख विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, प्रत्येक यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब तकनीशियन और स्थानीय वालंटियर होंगे, 25 प्रकार की जाँच और 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी.

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की साझा पहल
मुख्यमंत्री साय ने इस योजना को आदिवासी समुदाय की स्वास्थ्य सुरक्षा और सर्वांगीण विकास का ठोस आधार बताया, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि, यह यूनिट सुदूर वनांचलों के लिए वरदान साबित होगी.
प्रशिक्षित कर्मचारी और नियमित स्वास्थ्य शिविर
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के अनुसार, प्रत्येक यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात हैं, ये यूनिट हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिसमें जाँच, उपचार और दवाइयों का वितरण किया जाएगा, गंभीर रोगियों को निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा.
स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम
पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित नहीं पहुँच पाती थीं, अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता से यह व्यवस्था लगातार संचालित होगी, इससे टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और रोकथाम संभव होगी.




