CG News: जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक का संभाग स्तरीय आयोजन शुरू, मुख्यमंत्री साय करेंगे शुभारंभ
CG News: छत्तीसगढ़ के बस्तर में वर्षों से चली आ रही खेल परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बस्तर ओलिंपिक 2025 का संभाग स्तरीय आयोजन आज 11 दिसंबर से जगदलपुर में शुरू हो गया है, जो 13 दिसंबर तक चलेगा, कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे, और समापन 13 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे, समापन अवसर पर वे विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित भी करेंगे.
7 जिलों के खिलाड़ी करेंगे मुकाबला
इस आयोजन में बस्तर संभाग के 7 जिलों कांकेर, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर और कोंडागांव के सैकड़ों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, बस्तर की परंपरागत खेल प्रतिभा को प्रोत्साहन देने और युवाओं में खेल भावना को जगाने के उद्देश्य से यह आयोजन लगातार लोकप्रिय हो रहा है.
सरेंडर नक्सली और पीड़ित परिवारों की भागीदारी
इस वर्ष बस्तर ओलिंपिक की सबसे बड़ी विशेषता है, एक नई टीम ‘नुआ बाट’ जो सरेंडर किए गए नक्सलियों और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवारों के सदस्यों से बनी है, IG सुंदरराज पी ने बताया कि, यह 8वीं टीम बस्तर में उभरते सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है.
खिलाड़ियों की संख्या में भारी वृद्धि
IG के अनुसार साल 2024 में खिलाड़ियों की संख्या लगभग 350 थी, लेकिन वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 761 से अधिक हो गई है, यह दर्शाता है कि, खेलों के प्रति रुचि बढ़ी है और खिलाड़ी अब बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उत्साहित हैं.
तीन चरणों में चयन
बस्तर ओलिंपिक की चयन प्रक्रिया तीन चरणों से गुजरती है, ब्लॉक स्तरीय मुकाबले, जिला स्तरीय चयन और संभाग स्तरीय फाइनल प्रतियोगिता, ब्लॉक स्तर पर जीतने वाले खिलाड़ी जिला स्तर पर पहुंचे और अब जिला स्तर के विजेता संभाग स्तरीय फाइनल में मुकाबला करेंगे.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
13 दिसंबर को जगदलपुर में होने वाले समापन समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होंगे, वे इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में विजेताओं को सम्मानित करेंगे, उनकी मौजूदगी को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, पिछले वर्ष 2024 में भी शाह बस्तर ओलिंपिक में शामिल हुए थे और उन्होंने देशभर से नक्सलवाद खत्म करने की समयसीमा घोषित की थी.
खेलों के माध्यम से बदलाव की नई शुरुआत
बस्तर ओलिंपिक न केवल एक खेल आयोजन है, बल्कि, सामाजिक एकता, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल और युवा प्रतिभाओं के लिए एक मजबूत मंच का प्रतीक बन चुका है, इसमें सरेंडर नक्सलियों की भागीदारी बस्तर में शांति और मुख्यधारा में वापसी की दिशा में बड़ा कदम है.



