CG News: जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से गांवों में बढ़ी जागरूकता
CG News: प्रदेश में जल संरक्षण को एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस अभियान के तहत गांव-गांव में जल जागरूकता, प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र जल-संपन्न बन सकें।

बलरामपुर में चला व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम
बलरामपुर जिले के विभिन्न विकासखंडों में जनपद और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों और तकनीकी अमले को जल संरक्षण की आधुनिक और वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी गई।
वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान वर्षा जल को गांव में ही रोककर भू-जल स्तर बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को जल संरचनाओं के निर्माण और उनके उपयोग के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई।

5% मॉडल रिचार्ज टैंक की जानकारी
कार्यक्रम में 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक की संरचना और कार्यप्रणाली पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि यह चार स्तरीय मॉडल वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए अत्यंत प्रभावी तकनीक है, जिसकी क्षमता लगभग 1458 लीटर तक होती है। नमूना संरचना के माध्यम से इसका प्रदर्शन भी किया गया।
रिज टू वैली अवधारणा से जल संरक्षण
अभियान के तहत ‘रिज टू वैली’ अवधारणा पर आधारित तकनीकों की भी जानकारी दी जा रही है। इसमें स्ट्रैगर्ड कंटूर ट्रेंच, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच, गली प्लग, बोल्डर चेक और सोख्ता गड्ढों जैसी संरचनाएं शामिल हैं, जो वर्षा जल को रोकने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेषज्ञों के अनुसार इन संरचनाओं के निर्माण से कुओं, हैंडपंपों और बोरवेलों में जल स्तर में सुधार हो रहा है। इससे कृषि कार्यों को भी मजबूती मिल रही है और कम उपजाऊ भूमि को भी उपयोगी बनाया जा रहा है।
पर्यावरण और कृषि दोनों को लाभ
जल संरक्षण की ये तकनीकें न केवल भू-जल स्तर को बढ़ा रही हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद कर रही हैं। साथ ही कृषि उत्पादन में स्थिरता और सुधार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं, अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर इसे जनभागीदारी आधारित आंदोलन बनाना है, ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।



