CG News: राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम 2026: लाल किला मैदान में जनजातीय अस्मिता का भव्य उत्सव
CG News: नई दिल्ली स्थित लाल किला मैदान में आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से जनजातीय समाज के हजारों प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर हुआ, जिसमें जनजातीय संस्कृति, परंपरा और एकता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला।

मुख्यमंत्री साय का संबोधन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि यह समाज प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की अनूठी मिसाल पेश करता है।

प्रकृति और विकास का संतुलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन टिकाऊ विकास का मार्ग दिखा सकता है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा में जनजातीय समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
जनजातीय संस्कृति और भाषा संरक्षण
मुख्यमंत्री साय ने गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और शिक्षा में उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का आधार होती है।
छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान
छत्तीसगढ़ में लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र है, जो जनजातीय जीवन और संस्कृति का आधार है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन जनजातीय प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच दे रहे हैं, कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत प्रस्तुत किए। मांदर, ढोल और लोकधुनों से पूरा लाल किला मैदान जनजातीय संस्कृति के रंगों से भर गया।




