CG News: सुशासन शिविर बना मत्स्य पालकों के लिए वरदान, मुफ्त में मिले जाल और आइस बॉक्स
CG News: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आयोजित सुशासन तिहार शिविर अब ग्रामीणों और मत्स्य पालकों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनता जा रहा है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित इन शिविरों में लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है, वहीं विभागों द्वारा आधुनिक उपकरण और सामग्री भी निशुल्क वितरित की जा रही है।
बांटे उन्नत जाल और आइस बॉक्स
हाल ही में भूसारास और हल्बारास ग्राम पंचायतों में आयोजित शिविरों में मत्स्य विभाग द्वारा मछली पालन करने वाले किसानों को उन्नत जाल और आइस बॉक्स दिए गए। इससे मत्स्य पालकों को अपने व्यवसाय में काफी सहूलियत मिलने लगी है।
हिड़मा मंडावी को मिला जाल
भूसारास गांव के हिड़मा मंडावी पिछले 10 वर्षों से अपने तालाब में रोहू, कतला और मृगल मछलियों का पालन कर रहे हैं। इससे उन्हें हर साल 30 से 40 हजार रुपये तक की आय होती है, उन्होंने बताया कि पहले उनके पास खुद का जाल नहीं था और मछली पकड़ने के लिए किराए पर जाल लेना पड़ता था। लेकिन अब सुशासन शिविर में मुफ्त जाल मिलने से उनकी परेशानी दूर हो गई है।
महादेव मरकाम को राहत
इसी गांव के महादेव मरकाम को मछली विक्रय योजना के तहत आइस बॉक्स प्रदान किया गया। पहले उन्हें तालाब से निकाली गई मछलियों को तुरंत बाजार पहुंचाना पड़ता था, क्योंकि स्टोरेज की सुविधा नहीं थी, अब आइस बॉक्स मिलने से वे मछलियों को सुरक्षित रखकर आसानी से बाजार ले जा सकेंगे और खराब होने की चिंता भी खत्म हो गई है।
हल्बारास के किसानों को भी मिला लाभ
कुआकोंडा विकासखंड के हल्बारास गांव में भी मत्स्य पालकों को लाभ पहुंचाया गया। परमेश्वर राना, जो पिछले 8 वर्षों से मछली पालन कर रहे हैं, उन्हें मछली पकड़ने के लिए नया जाल दिया गया, वहीं सुनील कुमार भोयर को आइस बॉक्स मिलने से अब मछलियों को बाजार तक ले जाने में सुविधा होगी और खराब होने का खतरा कम हो जाएगा।
ग्रामीणों में दिखा उत्साह
सुशासन शिविरों में मिल रही सुविधाओं और त्वरित समाधान से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग शिविरों में पहुंचकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।
बदल रही ग्रामीणों की जिंदगी
राज्य सरकार की इस पहल से दूर-दराज के ग्रामीणों को न सिर्फ योजनाओं का लाभ मिल रहा है, बल्कि उनकी आर्थिक और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी हो रहा है। सुशासन तिहार अब ग्रामीणों के लिए उम्मीद और सहारे का मंच बनता जा रहा है।



