CG News: मयूर थीम में सजेगा रायपुर इस्कॉन मंदिर, जन्माष्टमी पर नॉनस्टॉप कीर्तन बनेगा आकर्षण का केंद्र
CG News: रायपुर के इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. इस बार मंदिर में तीन दिवसीय भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ स्कूली बच्चों के भी शामिल होने की संभावना है. आयोजकों के अनुसार जन्माष्टमी के दौरान करीब 9 से 10 लाख श्रद्धालु रायपुर पहुंच सकते हैं. मायापुर और दिल्ली से कथक कलाकारों के साथ खैरागढ़ के कलाकार भी विशेष प्रस्तुतियां देंगे.

मयूर थीम में दिखेगी मंदिर की सजावट
इस बार इस्कॉन मंदिर को खास मयूर थीम पर सजाने की तैयारी की गई है. मंदिर के बाहरी हिस्से से लेकर अंदर तक ताजे फूलों से आकर्षक सजावट की जाएगी. परिसर में कई स्थानों पर मोर पंखों का इस्तेमाल किया जाएगा. भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार भी इसी थीम के अनुरूप किया जाएगा. फूलों और मोर पंखों से तैयार सजावट श्रद्धालुओं के लिए आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहने वाली है.
![]()
लगातार गूंजेगा हरे कृष्णा संकीर्तन
जन्माष्टमी महोत्सव में इस बार नॉनस्टॉप हरे राम, हरे कृष्णा संकीर्तन विशेष आकर्षण रहेगा. आयोजकों के मुताबिक मंदिर परिसर में लगातार कीर्तन का आयोजन किया जाएगा. इसका उद्देश्य जन्माष्टमी की रात को पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में बदलना है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के संकीर्तन में शामिल होने की उम्मीद है और लगातार कीर्तन को रिकॉर्ड बनाने की दिशा में एक विशेष प्रयास बताया जा रहा है.
4 सितंबर को आधी रात में होगा जन्मोत्सव
जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन 4 सितंबर को सुबह 4 बजे भगवान श्रीकृष्ण की मंगल आरती और दर्शन के साथ शुरू होगा. इसके बाद पूरे दिन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहेंगे. श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था भी रहेगी. रात 9 बजे भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक किया जाएगा, जबकि रात 12 बजे महाआरती के साथ भगवान के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन होगा.
5 सितंबर को शीलाप्रभुपाद की व्यास पूजा
उत्सव के तीसरे दिन 5 सितंबर को शीलाप्रभुपाद के जन्मोत्सव के अवसर पर व्यास पूजा महोत्सव आयोजित किया जाएगा. इस दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के जरिए उनके योगदान को याद किया जाएगा. इस्कॉन मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार संस्था भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को लोगों तक पहुंचाने पर जोर देती है. मंदिर में भगवान की छह समय आरती और छह समय भोग की परंपरा के साथ सेवा और भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है.

