CG News: नक्सल प्रभावित इलाके में सामने आया बेंगपाल झरना, पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी
CG News: छत्तीसगढ़ का सुकमा अब नक्सल हिंसा के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी चर्चा में आने लगा है. नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के साथ ऐसे कई इलाके सामने आ रहे हैं, जो लंबे समय तक आम लोगों की पहुंच से दूर रहे. इसी बीच सुकमा के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थित बेंगपाल झरना आकर्षण का नया केंद्र बनकर सामने आया है. घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच मौजूद इस झरने की खूबसूरती देखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की टीम भी मौके पर पहुंची.

चार आला अधिकारियों ने लिया झरने का जायजा
बेंगपाल झरने की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर अमित कुमार, एसपी मयंक गुर्जर, जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर और डीएफओ अक्षय दिनकर भोसले ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया. झरने के निचले हिस्से तक पहुंचने के लिए अधिकारियों को काफी मुश्किल रास्ते से गुजरना पड़ा. वनकर्मियों के मुताबिक नीचे जाने वाला रास्ता संकरा, ढलान वाला और जोखिमभरा है. बारिश के कारण मिट्टी गीली होने से फिसलन भी बढ़ गई थी, जिससे ट्रैकिंग करना चुनौतीपूर्ण रहा.
आधे घंटे की ट्रेकिंग के बाद दिखा मनमोहक नजारा
अधिकारियों की टीम ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद करीब आधे घंटे तक ट्रेकिंग की. बारिश, पथरीली पहाड़ियों, गीली मिट्टी और फिसलन भरे रास्ते को पार करते हुए टीम झरने के निचले हिस्से तक पहुंची. वहां घने जंगलों के बीच पहाड़ियों से गिरता दूधिया पानी और आसपास का प्राकृतिक दृश्य देखकर अधिकारियों का उत्साह बढ़ गया. टीम ने बेंगपाल झरने की खूबसूरती को कैमरों में भी कैद किया. इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताएं इसे भविष्य में सुकमा के नए पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिला सकती हैं.
टूरिज्म स्पॉट बनाने पर प्रशासन की चर्चा
मौके पर अधिकारियों ने बेंगपाल झरने को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की. सबसे बड़ी प्राथमिकता झरने तक सुरक्षित पहुंच के लिए बेहतर रास्ता तैयार करना और जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना होगी. प्रशासन का मानना है कि यदि यहां पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जाता है तो स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार और आय के नए साधन मिल सकते हैं. इससे क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.
नक्सल क्षेत्र की बदलती पहचान का संकेत
बेंगपाल झरने का सामने आना सुकमा के बदलते माहौल की तस्वीर भी पेश करता है. जिन इलाकों में लंबे समय तक नक्सलवाद और हिंसा के कारण लोगों की आवाजाही सीमित रही, अब वहां प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाएं तलाशने की शुरुआत हो रही है. प्रशासन की कोशिश अगर आगे बढ़ती है तो बेंगपाल झरने को सुरक्षित और सुलभ बनाकर पर्यटकों के लिए विकसित किया जा सकता है. इससे सुकमा के जंगल, पहाड़ और झरनों की खूबसूरती देश-दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है.

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