CG News: जानिए नवागढ़ के सिद्ध श्री गणेश मंदिर का रहस्य, 1300 साल पुरानी विरासत और आस्था का संगम
CG News: बेमेतरा जिले के नवागढ़ में स्थित सिद्ध श्री गणेश मंदिर धार्मिक आस्था के साथ छत्तीसगढ़ की प्राचीन स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत का भी अहम केंद्र माना जाता है. यहां सालभर दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना गणेश जी पूरी करते हैं. मंदिर के सामने मौजूद प्राचीन शमी वृक्ष के कारण इसे श्री शमी गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. आसपास मौजूद तालाब, बावली, बगीचे और पुराने मंदिरों के अवशेष क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की ओर इशारा करते हैं.
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गोंड राजाओं के समय मंदिर निर्माण की मान्यता
इतिहासकार डॉ. बसुबंधु दीवान के शोध के अनुसार नवागढ़ का यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है. उनके मुताबिक मंदिर का निर्माण संभवत: संवत 704 यानी करीब 647 ईस्वी में गोंड राजाओं के काल में हुआ था. मंदिर के सामने स्थित शमी वृक्ष को भी इसी दौर से जुड़ा माना जाता है. इस प्राचीनता का उल्लेख गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित कल्याण पत्रिका में मिलने की बात कही जाती है. हालांकि इन ऐतिहासिक दावों को प्रमाणित करने के लिए व्यवस्थित पुरातात्विक अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

अष्टकोणीय मंदिर और प्राचीन कुआं
श्री खेड़ापति जी का यह मंदिर उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली की विशेषताओं को समेटे हुए है. इसकी सबसे अलग पहचान इसकी अष्टकोणीय संरचना है. मंदिर परिसर में ईंटों से तैयार किया गया एक प्राचीन अष्टकोणीय कुआं भी मौजूद है. यहां एक पुराने शिलालेख के मिलने की जानकारी भी सामने आती है, जिसकी लिपि प्राकृत होने की संभावना जताई गई है. मंदिर की बनावट और परिसर में मौजूद ये अवशेष इस स्थान को धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ इतिहास और स्थापत्य के नजरिए से भी खास बनाते हैं.
85 गांवों वाले परगने का प्रमुख केंद्र
डॉ. दीवान के अनुसार कल्चुरी काल में नवागढ़ करीब 85 गांवों वाले परगने का प्रमुख केंद्र था. क्षेत्र में मिट्टी से बने पुराने किले के अवशेष आज भी मौजूद बताए जाते हैं. आसपास माता महामाया का प्राचीन मंदिर, तालाब-बावली, बगीचे और अन्य मंदिरों के अवशेष भी मिलते हैं. इतिहास के अनुसार कल्चुरी शासन को छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है और उस समय रतनपुर सहित अलग-अलग स्थान प्रशासनिक और सैन्य गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे. ऐसे में नवागढ़ के प्राचीन अवशेष उस समय की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था को समझने में मदद कर सकते हैं.
मराठा काल से अब तक कई बार हुआ जीर्णोद्धार
समय के साथ मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार कराया गया. बताया जाता है कि 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले के आदेश पर मंदिर के कुछ हिस्सों का पुनर्निर्माण कराया गया था. ब्रिटिश काल में पुरातत्वविद जे.डी. ब्लंट ने भी मंदिर का सर्वेक्षण किया और इसकी ऐतिहासिक अहमियत दर्ज की. कुछ वर्ष पहले छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से मंदिर का फिर जीर्णोद्धार कराया गया. आज नवागढ़ में आस्था के साथ बिखरी प्राचीन मूर्तियां और स्थापत्य अवशेष इस क्षेत्र को पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं, जिनके संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है.


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