CG News: छत्तीसगढ़ में हाईवे इमरजेंसी सिस्टम सख्त, 1033 कॉल के बाद तुरंत रवाना होगी एंबुलेंस
CG News: नेशनल हाईवे पर सड़क हादसों में घायल लोगों को गोल्डन आवर के दौरान जल्द इलाज दिलाने के लिए NHAI ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स को लेकर नई गाइडलाइन लागू की है. इसके तहत अगर हादसा एंबुलेंस की तैनाती वाली जगह से 10 किलोमीटर के दायरे में होता है, तो सूचना मिलने के अधिकतम 10 मिनट के भीतर एंबुलेंस को मौके पर पहुंचना होगा. तय समय का पालन नहीं होने पर संबंधित एजेंसी पर प्रति घटना 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा.

1033 पर कॉल आते ही शुरू होगी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत 1033 कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही संबंधित टीम को इमरजेंसी टिकट एक मिनट के भीतर स्वीकार करना होगा. इसके बाद अगले दो मिनट के अंदर एंबुलेंस को घटनास्थल के लिए रवाना करना अनिवार्य रहेगा. इन दोनों चरणों में देरी होने पर 5 हजार रुपए प्रति मिनट के हिसाब से पेनाल्टी लगाई जाएगी. वहीं इमरजेंसी टिकट को रिजेक्ट करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना तय किया गया है.
588 किलोमीटर हाईवे पर लागू होगी व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में करीब 3,620 किलोमीटर नेशनल हाईवे है. इनमें NHAI के अधीन आने वाले 588 किलोमीटर हिस्से पर यह इमरजेंसी व्यवस्था लागू होगी. एंबुलेंस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हर 50 किलोमीटर के अंतराल पर वाहन तैनात किए जा रहे हैं. रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर फिलहाल 8 एंबुलेंस सक्रिय किए जाने की जानकारी है.
ज्यादा दूरी पर अलग होगा रिस्पॉन्स टाइम
हादसा यदि एंबुलेंस की निर्धारित तैनाती वाली जगह से 10 किलोमीटर के भीतर होता है, तो अधिकतम 10 मिनट में घटनास्थल तक पहुंचना जरूरी होगा. वहीं 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाले हादसों के लिए दूरी के आधार पर रिस्पॉन्स टाइम तय किया जाएगा. निर्धारित समय में एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ 10 हजार रुपए प्रति घटना की कार्रवाई की जाएगी.
समय पर नहीं पहुंची तो एजेंसी पर होगी कार्रवाई
रायपुर के NHAI रीजनल ऑफिसर आलोक कुमार के मुताबिक, टोल प्लाजा पर एंबुलेंस की सुविधा पहले से उपलब्ध है. अब मुख्यालय के निर्देश के बाद रिस्पॉन्स टाइम को लेकर जवाबदेही भी तय की गई है. हादसे के बाद अगर एंबुलेंस निर्धारित समय में मौके पर नहीं पहुंचती है, तो संबंधित एजेंसी पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी. नई व्यवस्था का उद्देश्य हाईवे हादसों में घायलों को बिना देरी के प्राथमिक चिकित्सा और अस्पताल तक पहुंचने में मदद देना है.
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