CG News: दंतेवाड़ा की समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान, 545 गांवों तक पहुंचाकर बदली हजारों जिंदगियां
CG News: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्होंने बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में सम्मान ग्रहण कर अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया, डॉ. बुधरी ताती ने किशोरावस्था में ही अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित करने का निर्णय ले लिया था। वर्ष 1984-85 में गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से प्रेरित होकर उन्होंने सामाजिक कार्यों की शुरुआत की। प्रशिक्षण लेने के बाद वे बस्तर लौटीं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए काम शुरू कर दिया।

35 वर्षों से गांव-गांव पहुंचा रहीं बदलाव
पिछले 35 वर्षों में डॉ. बुधरी ताती बस्तर के 545 से अधिक गांवों तक पैदल पहुंच चुकी हैं। उन्होंने दूरस्थ और कठिन इलाकों में जाकर महिलाओं, बच्चों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया। उनकी इसी सेवा भावना के कारण लोग उन्हें प्यार से ‘बुआ’ और ‘बड़ी दीदी’ कहकर बुलाते हैं, महिला सशक्तिकरण को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाकर उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। किसी को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया तो किसी को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही समाज की वास्तविक प्रगति का आधार है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बनाया मिशन
डॉ. बुधरी ताती ने महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और नशामुक्ति को लेकर जागरूकता अभियान चलाए। उनके प्रयासों से कई गांवों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले, डॉ. बुधरी ताती ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया। उन्होंने विवाह न करने का निर्णय लिया और समाज को ही अपना परिवार मान लिया। आज भी वे गरीब, अनाथ और जरूरतमंद लोगों की सेवा में जुटी हुई हैं।
जानलेवा हमलों के बावजूद नहीं डिगा हौसला
समाज सेवा के दौरान उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। एक बार अबूझमाड़ क्षेत्र में काम करते समय ग्रामीणों के विरोध और जानलेवा हमले का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने मिशन को जारी रखा, हिरानार में उन्होंने एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जहां बेसहारा बुजुर्गों को आश्रय और सम्मान मिल रहा है। इसके अलावा वे गरीब और अनाथ आदिवासी बच्चों की शिक्षा और भविष्य संवारने का काम भी कर रही हैं।
पद्मश्री बना 23वां सम्मान
डॉ. बुधरी ताती को समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पहले ही 22 सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार शामिल हैं। पद्मश्री उनके जीवन का 23वां सम्मान है, जिसने उनके दशकों के समर्पण और संघर्ष को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है, डॉ. बुधरी ताती की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
