CG News: छत्तीसगढ़ कैबिनेट बैठक 2026: मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में कैबिनेट के अहम फैसले
CG News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में राज्य के शिक्षा क्षेत्र, सिनेमा और पूर्व अग्निवीरों के रोजगार से जुड़े कई दूरगामी निर्णय लिए गए. कैबिनेट ने शासकीय महाविद्यालयों की अतिथि व्याख्याता नीति में संशोधन को कार्योत्तर मंजूरी देने के साथ-साथ पूर्व अग्निवीरों के लिए विशेष भर्ती नियम-2026 को भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है.

अतिथि व्याख्याता नीति 2026 में बड़े बदलाव
संशोधित अतिथि व्याख्याता नीति-2026 के तहत अब मेरिट सूची में समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा, अनुभव के अधिकतम 30 अंकों के प्रावधान में भी सुधार किया गया है. अब शासकीय कॉलेजों के साथ-साथ राजकीय विश्वविद्यालयों में एक सत्र में न्यूनतम 5 महीने पढ़ा चुके अभ्यर्थियों को 5 अंक का अनुभव लाभ मिलेगा. साथ ही, विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर मिलेगा और मानदेय अब कालखंड के बजाय कार्य-दिवस के आधार पर दिया जाएगा.
‘भर्ती नियम-2026’ को मिली मंजूरी
राज्य सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय को लागू करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम, 2026’ को मंजूरी दे दी है. इसके तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा. इन नियमों में अग्निवीरों की नियुक्ति, सेवा शर्तें, भर्ती मापदंड और चयन प्रक्रिया को पूरी तरह स्पष्ट किया गया है.
फिल्म ‘हनुमान अंश’ राज्य में हुई टैक्स फ्री
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री द्वारा 10 सितंबर 2026 को फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री करने की घोषणा का औपचारिक अनुसमर्थन किया. वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सिनेमाघरों में दर्शकों से लिए जाने वाले प्रवेश शुल्क पर देय राज्य माल एवं सेवा कर (SGST) के बराबर की राशि की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा सिनेमाघरों को की जाएगी, जिससे दर्शक सस्ती दरों पर यह फिल्म देख सकेंगे.
युवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
कैबिनेट द्वारा लिए गए ये फैसले राज्य के युवाओं, पूर्व सैनिकों और शैक्षणिक जगत के लिए बेहद राहत देने वाले माने जा रहे हैं. एक तरफ जहां पूर्व अग्निवीरों को सेना से लौटने के बाद सरकारी नौकरियों में स्थायी अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय और सेवा शर्तों में सुधार से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और मजबूत होगी.

