CG News: छत्तीसगढ़ BJP में नए प्रदेश प्रभारी की तलाश तेज, कई नामों पर मंथन
CG News: भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हालिया नियुक्तियों के बाद अब छत्तीसगढ़ के नए प्रदेश प्रभारी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. फिलहाल प्रदेश प्रभारी की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ही छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. माना जा रहा है कि केंद्रीय संगठन जल्द ही राज्य के लिए नए प्रभारी के नाम का ऐलान कर सकता है.

राष्ट्रीय स्तर के नेता को मिल सकती है जिम्मेदारी
भाजपा में राज्यों के प्रभारी पद पर राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देने की परंपरा रही है. हाल ही में विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश और डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है. इसके बाद छत्तीसगढ़ के लिए भी किसी अनुभवी राष्ट्रीय नेता के नाम को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा शुरू हो गई है. राष्ट्रीय महामंत्री के अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या राष्ट्रीय मंत्री को भी यह जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है.
2028 चुनाव के कारण बढ़ी जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. पार्टी संगठन के सामने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के साथ जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी. इसी वजह से केंद्रीय नेतृत्व ऐसे नेता को जिम्मेदारी दे सकता है, जिसे संगठन और चुनावी रणनीति का लंबा अनुभव हो.
कई नामों की चर्चा
प्रदेश प्रभारी पद के लिए राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल, गजेंद्र पटेल और हरीश द्विवेदी के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में बताए जा रहे हैं. इनके अलावा राष्ट्रीय मंत्री डॉ. संदीप पाठक के नाम की भी चर्चा है. डॉ. पाठक का संबंध छत्तीसगढ़ के मुंगेली से बताया जाता है और वे आम आदमी पार्टी में रहते हुए छत्तीसगढ़ के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. हालांकि इनमें से किसी नाम पर अभी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है.
अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा
नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय संगठन करेगा. 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह नियुक्ति पार्टी की आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. नए प्रभारी के सामने संगठन को सक्रिय रखने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने और सरकार तथा संगठन के बीच तालमेल मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी. अब सभी की नजर केंद्रीय नेतृत्व की आधिकारिक घोषणा पर टिकी है.




