CG News: भिलाई के मूर्तिकार परवेज आलम की कहानी, कबाड़ से रची कला, राजधानी में बनाई भव्य आंबेडकर प्रतिमा
CG News: राजधानी के घड़ी चौक पर स्थापित डॉ. भीमराव आंबेडकर की विशाल कांस्य प्रतिमा इन दिनों आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस भव्य मूर्ति को भिलाई के मूर्तिकार परवेज आलम ने तैयार किया है, जिनकी कला हर किसी को प्रभावित कर रही है।
10वीं पास, लेकिन हुनर में माहिर
परवेज आलम ने केवल 10वीं तक पढ़ाई की है, लेकिन उनकी प्रतिभा ने उन्हें खास पहचान दिलाई है। बचपन से पेंटिंग और मूर्तिकला का शौक रखने वाले परवेज ने साल 2000 से इस क्षेत्र में काम शुरू किया और आज वे 100 से ज्यादा मूर्तियां बना चुके हैं।
समय पर काम पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती
परवेज की टीम में 6 सदस्य शामिल हैं, लेकिन बड़े प्रोजेक्ट के दौरान अतिरिक्त कारीगर भी बुलाए जाते हैं। वे बताते हैं कि समय पर मूर्ति तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिसके लिए कई बार उन्हें रात-रात भर काम करना पड़ता है।
कबाड़ से बनती है कला की पहचान
कांसे की मूर्तियों को बनाने के लिए कॉपर, जिंक, टिन और लेड का मिश्रण इस्तेमाल होता है। परवेज पुरानी कांसे की वस्तुओं को कबाड़ से खरीदकर उन्हें रिसाइकिल करते हैं और नई मूर्तियों का रूप देते हैं। इससे उनकी कला न केवल टिकाऊ होती है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी दर्शाती है।
पद्मश्री गुरु से सीखी कला की बारीकियां
परवेज ने प्रसिद्ध मूर्तिकार जॉन मार्टिन नेल्सन से प्रशिक्षण लेकर अपनी कला को निखारा। इसके अलावा खैरागढ़ यूनिवर्सिटी में भी उन्होंने कास्टिंग की तकनीक सीखी। आज वे कांसे के साथ-साथ सीमेंट और फाइबर की मूर्तियां भी बना रहे हैं।
