CG News: सशक्त महिलाएँ, सशक्त भारत, सरकार की पहल से नेतृत्व तक की प्रगति
CG News: भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। योजनाओं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण से महिलाओं की निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ी है। शिक्षा, कानूनी सुधार और सुरक्षा उपाय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जीवन-चक्र आधारित समग्र दृष्टिकोण
भारत सरकार अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाओं को जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक आवश्यकताओं के अनुसार आत्मनिर्भर और निर्णयकारी बनाने के लिए कार्य कर रही है। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “Women-Led Development” की दिशा में भारत की यात्रा को दर्शाता है।

स्वास्थ्य और पोषण क्षेत्र में सुधार
मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 4.27 करोड़ महिलाओं को वित्तीय सहायता मिली।
14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं।
मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर घटकर 17 हो गई।
वित्तीय समावेशन और आजीविका
प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।
57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खातों के नाम महिलाओं के हैं।
मुद्रा योजना के कुल ऋणों में 68 प्रतिशत महिलाओं को वितरित किए गए।
स्टैंड-अप इंडिया योजना के अंतर्गत 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं।
10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर हुईं।
आवास, स्वच्छता और जल जीवन मिशन
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2.90 करोड़ घर महिलाओं के नाम।
उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ शौचालय।
जल जीवन मिशन से 15.83 करोड़ घरों में नल जल सुविधा।
शिक्षा और कौशल विकास
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों से छात्राओं को शिक्षा और कौशल में प्रोत्साहन।
उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत और पीएचडी में 135.6 प्रतिशत वृद्धि।
विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 छात्राओं को प्रोत्साहन।
सुरक्षा और संरक्षा
मिशन शक्ति के तहत “सम्बल” और “समर्थ्य” के स्तंभ पर कार्य।
वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 और 13.90 लाख महिलाओं को सहायता।
महिला हेल्पलाइन (181, 112) से 99.09 लाख महिलाओं को मदद।
416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।
महिलाएं राष्ट्र शक्ति का आधार
आज भारत में महिलाएँ केवल कल्याण की प्राप्तकर्ता नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी प्रगति की धुरी बन रही हैं। महिलाएँ अपने परिवार और समाज की धुरी हैं और राष्ट्र शक्ति का आधार बन रही हैं। यही वास्तविक “Women-Led Development” की दिशा है।

