Jashpur News: ‘जशक्राफ्ट’ को मिला राष्ट्रीय मंच, देश के बड़े एयरपोर्ट्स पर बिकेंगे महिलाओं के हाथ से बने उत्पाद, CM साय की मौजूदगी में ऐतिहासिक MOU
Jashpur News: छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति अब सात समंदर पार जाने की तैयारी में है, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में जशपुर के ‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड और प्रसिद्ध संस्था ‘रेयर प्लेनेट’ के बीच एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) हुआ है, इस समझौते के बाद जशपुर की महिलाओं द्वारा निर्मित बांस, मिट्टी, लकड़ी और छिंद के अनूठे उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे.
महिलाओं को मिला ग्लोबल मार्केट
वन विभाग की इस अनूठी पहल से जशपुर की महिला स्व-सहायता समूहों (जागरण, स्माइल आरती, राखी और मुस्कान) की किस्मत बदलने वाली है,
• राष्ट्रीय पहचान: अब दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के एयरपोर्ट पर यात्री जशपुर के हस्तशिल्प और आभूषण खरीद सकेंगे
• सीधी आय: बिचौलियों के खत्म होने से महिलाओं को उनके उत्पादों का उचित मूल्य और नियमित आय मिलेगी,
• वोकल फॉर लोकल: यह कदम प्रधानमंत्री के ‘लोकल टू ग्लोबल’ के सपने को छत्तीसगढ़ की धरती पर साकार कर रहा है.

“आत्मसम्मान और आर्थिक आजादी की नई नींव” : CM साय
एमओयू के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशक्राफ्ट की सराहना करते हुए इसे महिलाओं के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया, उन्होंने कहा, हमारी आदिवासी बहनों की कला अब केवल गांव तक सीमित नहीं रहेगी, जशक्राफ्ट के माध्यम से उनका हुनर देशभर में पहुंचेगा, यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने और उनके आत्मसम्मान को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी जीत है.
जशक्राफ्ट: परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम
जशपुर जिले की 65% आबादी जनजातीय है, जहाँ पीढ़ियों से प्राकृतिक संसाधनों से कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है, ‘जशक्राफ्ट’ ने इस बिखरे हुए हुनर को एक ब्रांड का रूप दिया है,
• बिना मशीन का जादू: यहाँ के उत्पाद पूरी तरह हाथों से बने हैं, जो प्रकृति और स्वदेशी ज्ञान का संदेश देते हैं,
• विविधता: बांस के आभूषण, कांसा घास की कलाकृतियां और छिंद पत्तों के सजावटी सामान जशक्राफ्ट की मुख्य पहचान हैं.
विशेष पुस्तक और वीडियो का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘जशक्राफ्ट’ पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक और प्रचार वीडियो का विमोचन भी किया, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय और विधायक श्रीमती गोमती साय का स्वागत महिलाओं ने जशक्राफ्ट के पारंपरिक आभूषण पहनाकर किया, जो इस ब्रांड की बढ़ती लोकप्रियता का प्रतीक बना.
हस्तशिल्प मानचित्र पर जशपुर
जिला प्रशासन और वन विभाग के इस साझा प्रयास से जशपुर अब राष्ट्रीय हस्तशिल्प मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान बना रहा है, यह मॉडल न केवल आजीविका प्रदान कर रहा है, बल्कि विलुप्त होती जनजातीय कलाओं को संरक्षण भी दे रहा है, आने वाले समय में ‘जशक्राफ्ट’ छत्तीसगढ़ के सबसे सफल महिला उद्यमिता मॉडल के रूप में जाना जाएगा.



