CG News: बस्तर बन रहा देश का नया टूरिस्ट हब, 4 महीने में 20 लाख से ज्यादा सैलानी पहुंचे
CG News: सितंबर 2025 से शुरू हुए टूरिस्ट सीजन में अब तक बस्तर संभाग में 20 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं, यह आंकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ रहा है और यह साफ संकेत है कि, बस्तर अब नक्सल हिंसा के कारण पहचाने जाने वाला क्षेत्र नहीं रहा, अब यह पर्यटन के नए हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है.
सातों जिलों में बढ़ा पर्यटन फुटफॉल
साल 2025-26 में बस्तर संभाग के सातों जिलों बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में पर्यटकों की संख्या ने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी, बारसूर, दंतेश्वरी मंदिर और रामाराम जैसे स्थलों पर हर वीकेंड हजारों सैलानी पहुंच रहे हैं.

बीजापुर-दंतेवाड़ा के दूरस्थ अंचलों तक पहुंच
नक्सल गतिविधियों में भारी गिरावट के बाद अब पर्यटक बीजापुर और दंतेवाड़ा के सुदूर इलाकों तक भी बेखौफ पहुंच रहे हैं, नंबी जैसे दूरस्थ जलप्रपात और दंतेवाड़ा के हांदावाड़ा तक अब पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, जो बस्तर में स्थायी शांति का सबसे बड़ा संकेत है.
विदेश से भी आए सैलानी
पर्यटन मंडल के स्थानीय कार्यालय के अनुसार, सितंबर 2025 से अब तक चार महीनों में 20 लाख से अधिक पर्यटक बस्तर पहुंचे हैं, इनमें देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेश से भी सैलानी शामिल हैं, पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस साल 7 लाख से ज्यादा अतिरिक्त पर्यटक आए हैं, खासकर 20 दिसंबर से 5 जनवरी के बीच मात्र 15 दिनों में 5 लाख से अधिक पर्यटक बस्तर पहुंचे.

सुविधाओं का अभाव
पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं, कई जगह रहने की व्यवस्था, सड़क, शौचालय, पार्किंग, गाइड और खानपान जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी पर्याप्त नहीं हैं, स्थानीय लोग और व्यवसायी मानते हैं कि, यदि समय रहते सुविधाएं नहीं बढ़ाईं गईं, तो यह सुनहरा अवसर हाथ से निकल सकता है.
पर्यटन से रोजगार के नए अवसर
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि, बस्तर में होम-स्टे, रिसॉर्ट, ईको टूरिज्म सेंटर, ट्राइबल हाट और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देकर हजारों युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है, बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और शांतिपूर्ण वातावरण अब खुद एक ब्रांड बन रही है, बस इसे सही दिशा देने की जरूरत है.
बस्तर बन सकता है देश का बड़ा टूरिस्ट हब
एक समय था जब बस्तर का नाम आते ही नक्सल हिंसा की तस्वीर उभरती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है, जंगल, जलप्रपात, आदिवासी संस्कृति और सुरक्षित माहौल बस्तर की नई पहचान बन रहे हैं, अगर यही रफ्तार बनी रही और सुविधाएं समय पर बढ़ीं, तो आने वाले वर्षों में बस्तर देश का बड़ा टूरिस्ट हब बन सकता है.
बस्तर का उज्ज्वल भविष्य
बस्तर में पर्यटन की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि, लोगों की सोच बदल रही है और इस क्षेत्र पर भरोसा बढ़ रहा है, यह बदलाव बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी बुनियाद बन रहा है, और अगर सही योजनाओं के साथ इसे आगे बढ़ाया गया, तो बस्तर छत्तीसगढ़ का गौरव ही नहीं, बल्कि देश का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है.




