CG News: छत्तीसगढ़ में खेती का नया मॉडल, फसल विविधीकरण से समृद्धि
CG News: छत्तीसगढ़ सरकार की कृषक उन्नति योजना 2.0 ने खेती की दिशा बदल दी है। धान पर निर्भरता घटाकर दलहन-तिलहन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ी है और पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
धान पर निर्भरता से संकट
“धान का कटोरा” कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में खेती लंबे समय तक धान पर आधारित रही। लेकिन जल संकट, मिट्टी की घटती उर्वरता और बढ़ती लागत ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल धान पर निर्भर खेती न तो टिकाऊ है और न ही लाभकारी। इसी चुनौती को समझते हुए साय सरकार ने कृषक उन्नति योजना 2.0 की शुरुआत की।

कृषक उन्नति योजना 2.0 की प्रमुख विशेषताएं
इस योजना के तहत किसानों को फसल के अनुसार प्रति एकड़ 10,000 से 15,351 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी जैसी जरूरतों के लिए यह राशि DBT के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई जा रही है, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों मजबूत हुए हैं।
दलहन–तिलहन की ओर बढ़ता किसान
योजना का सबसे सकारात्मक असर यह है कि किसान अब अरहर, चना, मसूर, सरसों, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। कम लागत, कम पानी की जरूरत, बेहतर मुनाफा और MSP पर खरीदी की गारंटी ने इस बदलाव को गति दी है। खरीफ सीजन में दलहन-तिलहन खरीदी के लिए 425 करोड़ रुपये की स्वीकृति किसानों के लिए बड़ी राहत बनी है।
आर्थिक मजबूती और पर्यावरण संरक्षण
दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती हैं और जल संरक्षण में सहायक हैं। इससे खेती अधिक पर्यावरण-अनुकूल बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, “यह योजना सहायता नहीं, बल्कि कृषि विकास की नींव है।” कृषक उन्नति योजना 2.0 से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और छत्तीसगढ़ देश के कृषि मॉडल राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



