January 14, 2026 11:37 am

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CG News: धमतरी की ग्रामीण महिलाओं ने अपनाई मखाना खेती, आय और आत्मनिर्भरता की राह

CG News: धमतरी की ग्रामीण महिलाओं ने अपनाई मखाना खेती, आय और आत्मनिर्भरता की राह
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CG News: धमतरी की ग्रामीण महिलाओं ने अपनाई मखाना खेती, आय और आत्मनिर्भरता की राह

CG News: कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक नई मिसाल कायम की है, विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 महिला किसान समूह रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचे, जहां उन्होंने मखाना की आधुनिक खेती और प्रोसेसिंग तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया, इस अध्ययन भ्रमण का आयोजन जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा किया गया.

धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक  तस्वीर

मखाना खेती को मिल रहा बढ़ावा

धमतरी कलेक्टर की पहल पर जिले में मखाना खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के प्रयास तेज़ी से किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर सृजित हो रहे हैं.

मखाना से समृद्धि की राह

अब धमतरी की ग्रामीण महिलाएं परंपरागत धान खेती से आगे बढ़कर मखाना उत्पादन को आत्मनिर्भरता का साधन बना रही हैं, छोटी-छोटी डबरियों में मखाना की खेती से महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक सशक्तिकरण का भरोसेमंद रास्ता मिल रहा है.

मखाना खेती महिलाओं को दे रहा आत्मनिर्भरता की राह, जिला प्रशासन की मदद से  डबरी से समृद्धि तक का सफर

90 एकड़ में शुरू हुई मखाना खेती

कलेक्टर के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह और सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है, महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण कर उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी प्रक्रिया को समझा.

लागत कम, बाजार संभावनाएं मजबूत

ओजस फार्म के प्रबंधक संजय नामदेव ने किसानों को बीज चयन, उत्पादन लागत, प्रसंस्करण और बाजार संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी, उन्होंने बताया कि, उचित प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग से मखाना खेती अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है.

मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर

मखाना खेती से स्थायी आय का स्रोत

कृषि विशेषज्ञ शिव साहू ने बताया कि मखाना खेती कम जोखिम वाली फसल है, जिससे लंबे समय तक स्थायी आय अर्जित की जा सकती है, महिला किसानों ने भी इसे आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी माध्यम बताया.

एक किलो बीज से 250 ग्राम पॉप

मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ रोहित साहनी ने बताया कि, 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक होती है, स्वयं प्रसंस्करण और पैकेजिंग करने पर मुनाफा और बढ़ जाता है.

मखाना खेती – किसानों की समृद्धि और स्वास्थ्य की नई राह - Hamar dhamtari

प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उत्पादन संभव

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया कि, प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसतन 10 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, छह माह की यह फसल कीट-व्याधियों और चोरी जैसी समस्याओं से लगभग मुक्त रहती है.

छत्तीसगढ़ का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र

उप संचालक उद्यानिकी डॉ. पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में किसानों को मखाना बोर्ड और राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और सब्सिडी जैसी सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं, गौरतलब है कि, छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक मखाना उत्पादन की शुरुआत आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह से हुई थी, जहां राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

मखाना खेती अब छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रही है, धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास यह साबित करता है कि, सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है.

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