CG News: धन – धान्य कृषि योजना ने बदली खेती की तस्वीर, किसानों को मिला आत्मनिर्भरता का सहारा
CG News: प्रधानमंत्री धन – धान्य कृषि योजना की शुरुआत जुलाई 2025-26 में की गई और अक्टूबर 2025 में इसे औपचारिक स्वीकृति मिली, इस योजना का लक्ष्य देश के 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में लगभग 1.7 करोड़ किसानों की आय और कृषि उत्पादकता को बढ़ाना है, इसके अंतर्गत 11 मंत्रालय की 36 योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन किया जा रहा है.
फसल विविधीकरण पर फोकस
इस योजना में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक भंडारण संरचनाओं,आसान ऋण व्यवस्था और फसल विविधीकरण को प्राथमिकता दी गई है, इसका उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़ाकर आधुनिक और लाभकारी कृषि की ओर ले जाना है.

जशपुर में दिखा योजना का असर
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित यह योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है, सीएम विष्णु देव साय की कृषि – हितैषी नीतियों और योजनाओं के तेज क्रियान्वयन से किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है.
किसान सुधीर लकड़ा की सफलता की कहानी
बगीचा विकासखंड के किसान सुधीर लकड़ा इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी हैं, उनके पास 3.400 हेक्टेयर भूमि है, जहां आत्मा योजना, डीएमएफ से मिले कृषि यंत्र और सौर सुजला योजना की सोलर सिंचाई सुविधा ने उनकी खेती को कम लागत और अधिक लाभकारी बनाया.

मक्का उत्पादन से बढ़ी आमदनी
कृषि विस्तार अधिकारी की सलाह पर सुधीर लकड़ा ने धान के स्थान पर प्री – बेज ग्रेड मक्का की खेती अपनाई, विभाग द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए 8 किलोमीटर बीज से 0.400 हेक्टेयर में खेती कर उन्होंने लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया, जिससे करीब 15,000 रूपए की अतिरिक्त आय हुई.
2030 तक किसानों की आय दोगुनी
धन – धान्य कृषि योजना के तहत आधुनिक कृषि तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई और मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे फसल की गुणवत्ता में सुधार के साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है, यह योजना वर्ष 2030 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है, इसके अंतर्गत उत्पादन में 20-30 प्रतिशत वृद्धि, कटाई के बाद नुकसान में कमी, जैविक खेती को प्रोत्साहन और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं.
महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसर
योजना के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को डेयरी, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों से जोड़कर कृषि आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है.



