CG News: छत्तीसगढ़ में लागू होगी प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क तकनीक, कम पानी में ज्यादा सिंचाई
CG News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि, वर्तमान में छत्तीसगढ़ में अधिकांश सिंचाई पारंपरिक नहर प्रणाली पर आधारित है, लेकिन इस पद्धति में पानी का बड़ा हिस्सा रिसाव और वाष्पीकरण में चला जाता है, कमांड एरिया के सभी हिस्सों तक समान पानी नहीं पहुंचता, कुल सिंचाई दक्षता केवल 35% है.
प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क से 65% से अधिक दक्षता
नई तकनीक में पानी नियंत्रित दबाव के साथ पाइपलाइन के माध्यम से सीधे खेतों तक पहुँचता है, इससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य, रिसाव और वाष्पीकरण में कमी, टेल-एंड क्षेत्रों तक समान मात्रा में पानी और कुल सिंचाई दक्षता 65% या उससे अधिक जैसे फायदे शामिल हैं.
कम भू-अधिग्रहण, लागत और ऊर्जा की बचत
पाइपलाइन आधारित होने से नहर निर्माण की जरूरत कम हो जाएगी और भूमि अधिग्रहण न्यूनतम हो जाएगी, साथ हीं परियोजनाएं समय पर और कम लागत में पूरी भी हो जाएंगी और उच्च पंपिंग दक्षता से बिजली की बचत भी की जा सकती है.
मध्य प्रदेश मॉडल से प्रेरणा
मध्य प्रदेश में वर्तमान में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्रेशर इरिगेशन तकनीक से सिंचाई हो रही है, आने वाले वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित किया जाएगा, इस तकनीक से जल उपयोग दक्षता और उत्पादन में बढ़ोतरी और सिंचाई कवरेज में वृद्धि हुई है.
चरणबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश
भोपाल में मुख्यमंत्री साय ने तकनीक का विस्तृत प्रेजेंटेशन देखा, उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ में इसे अधिकतम उपयोग में लाया जाएगा, इससे किसानों को कम पानी में बेहतर सिंचाई और अधिक उत्पादन मिलेगा और भूमि अधिग्रहण की जरूरत कम होने से परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा, उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
किसानों को प्रत्यक्ष लाभ
इस तकनीक से पानी का पूरा उपयोग किया जा सकेगा और पूरे क्षेत्र में समान रूप से सिंचाई भी हो पाएगी, इससे फसल उत्पादकता में वृद्धि होगी और जल प्रबंधन प्रभावी होगा, कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिचाईं से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ होगा और उनकी आय में वृद्धि होगी.




