CG Success Story: सीसल के रेशों से शोभा बघेल ने बनाई पहचान, 1000 से अधिक महिलाओं को सिखाया हुनर और स्वरोजगार की राह
CG Success Story: छत्तीसगढ़ में दीपावली और अन्य त्योहारों के अवसर पर स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग बढ़ रही है. बाजारों में पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक कला से तैयार सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. इसी बीच बस्तर के परचनपाल की हस्तशिल्प कलाकार शोभा बघेल द्वारा बनाए गए सीसल के बैग और सजावटी उत्पादों की भी खूब मांग हो रही है. शोभा ने लोगों से अपील की है कि त्योहारों पर उपहार और घर की सजावट के लिए स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता दें, ताकि उनकी कला को पहचान मिलने के साथ परिवारों को रोजगार भी मिल सके.

वर्ष 2004 में शुरू हुआ हुनर का सफर
शोभा बघेल की इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और सीखने की लगन है. उनके हस्तशिल्प सफर की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब उन्होंने हस्तशिल्प विकास बोर्ड से सीसल के प्राकृतिक रेशों से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उन्होंने इस हुनर को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया. सीसल के मजबूत रेशों को बारीकी से गूंथकर उन्होंने अलग-अलग तरह की उपयोगी और आकर्षक कलाकृतियां तैयार करना शुरू किया.
सीसल से तैयार करती हैं 40 से 50 तरह के उत्पाद
शोभा बघेल सीसल के प्राकृतिक रेशों से बैग, दीवार सजावट, टेबल मैट और उपहार में दिए जाने वाले कई तरह के उत्पाद बनाती हैं. उनके हाथों से तैयार होने वाली कलाकृतियों की खासियत उनकी पारंपरिक बनावट और टिकाऊपन है. वर्तमान में वह करीब 40 से 50 प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर रही हैं. उनकी कला को धीरे-धीरे बाजार में पहचान मिली और अब इन उत्पादों की मांग विभिन्न मेलों और प्रदर्शनी में भी होने लगी है.

हर महीने 20 हजार तक कमाई
शोभा बघेल के बनाए उत्पाद चित्रकोट, शबरी एम्पोरियम, राज्योत्सव और सरस मेलों जैसे विभिन्न मंचों पर बिक्री के लिए उपलब्ध होते हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचकर भी हस्तनिर्मित सामान खरीदते हैं. इस काम से उन्हें हर महीने लगभग 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है. हस्तशिल्प ने न केवल उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर भी दिया है.
एक हजार से अधिक महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
शोभा बघेल ने अपनी कला और अनुभव को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की एक हजार से अधिक महिलाओं को सीसल हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया है. इस पहल के जरिए कई महिलाओं को घर के आसपास ही काम करने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिला है. उनका प्रयास ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
वोकल फॉर लोकल और महिला सशक्तिकरण की मिसाल
शोभा बघेल की कहानी स्थानीय कला, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के महत्व को सामने लाती है. त्योहारों के दौरान सीसल से बने पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को मिल रही पसंद से स्थानीय हस्तशिल्प को नया बाजार मिल रहा है. यदि लोग स्थानीय कारीगरों के बनाए सामान खरीदते हैं, तो इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. शोभा बघेल का यह सफर बताता है कि सही प्रशिक्षण, मेहनत और हुनर के दम पर स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं.


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