Special Story: छत्तीसगढ़ के राजिम में स्थित है रहस्यमयी गुफावाली श्मशान काली मंदिर, नवरात्रि में उमड़ती है दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भीड़
Special Story: छत्तीसगढ़ के पवित्र धार्मिक क्षेत्र और राज्य के प्रयागराज के रूप में पहचाने जाने वाले राजिम में कई प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, लेकिन इन्हीं के बीच एक ऐसा रहस्यमयी और चमत्कारी साधना स्थल भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, सोमेश्वरनाथ महादेव मंदिर के महामंडप के भीतर स्थित करीब 81 साल पुरानी एक प्राचीन गुफा में मां श्मशान काली विराजमान हैं, अपने अत्यंत रौद्र स्वरूप वाली मां काली की यह प्रतिमा और यहां होने वाली दस महाविद्याओं की कठिन तांत्रिक साधना देश भर के श्रद्धालुओं और साधकों के बीच गहरी आस्था का एक बड़ा केंद्र बनी हुई है, नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान यहां छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार और पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और साधना के लिए पहुंचते हैं.

संकरी गुफा और प्रवेश का अनूठा तरीका
इस मंदिर की बनावट और गर्भगृह तक पहुंचने का रास्ता इसे अन्य सभी मंदिरों से बिल्कुल अलग पहचान देता है, यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर के भीतर झुककर और कई बार लेटकर एक बेहद संकरी जगह से गुजरना पड़ता है, जिसके बाद कुछ सीढ़ियां पार करने पर मां के दर्शन प्राप्त होते हैं, मंदिर के महामंडप में पश्चिम दिशा की ओर स्थित इस गुफा का प्रवेश द्वार पूर्वाभिमुख है, दो विशाल खंभों के मध्य स्थित गर्भगृह में मां श्मशान काली की प्रतिमा अपने प्रचंड और रौद्र रूप में विराजमान है, इस दिव्य प्रतिमा में मां के चरणों के ठीक नीचे भगवान शिव दिखाई देते हैं, और उनके समीप ही श्री गणेश जी तथा नागिन की सुंदर आकृतियां भी उकेरी गई हैं, गुफा का संकरा प्रवेश और भीतर का शांत व रहस्यमयी वातावरण भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव कराता है.

1939 में हुई थी स्थापना
महानदी के पावन तट पर साल 1939 में परिनीतानंद जी महाराज ने संस्कृत विद्यापीठ की शुरुआत की थी, बताया जाता है कि हरिद्वार के प्रसिद्ध परमार्थ निकेतन से जुड़े परिनीतानंद महाराज ने ही इस स्थान पर मां श्मशान काली की स्थापना की थी, उस समय यह पूरा स्थान एक समतल भूमि था, लेकिन बाद में गुफा के भीतर मां की प्रतिमा की स्थापना होने के बाद यह स्थल एक विशिष्ट और जागृत साधना केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हो गया, स्थानीय भक्त इस गुफावाली श्मशान काली को बड़े प्रेम से ‘स्वप्नवती मां’ के नाम से भी पुकारते हैं, ऐसी गहरी मान्यता है कि मां स्वयं भक्तों को स्वप्न में दर्शन देकर उन्हें अपने दरबार तक बुलावा भेजती हैं, और क्वांर नवरात्रि के दौरान यहां विशेष तांत्रिक अनुष्ठान किए जाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है.
बाल स्वरूप और अन्य देवी-देवताओं की मौजूदगी
गुफावाली श्मशान काली की यह प्रतिमा पहले अपने पूर्ण रौद्र स्वरूप में हुआ करती थी, लेकिन निरंतर होने वाली पूजा-अर्चना और साधना के प्रभाव से अब यह एक छोटी बालिका के सौम्य और शांत स्वरूप में भी अनुभव होती है, इस पवित्र गुफा के भीतर केवल मां श्मशान काली ही नहीं, बल्कि मां यक्ष-यक्षिणी, योगिनी, वीरभद्र, कालभैरव, दक्षिणमुखी हनुमान और बाल स्वरूप नंदी भी पूरी दिव्यता के साथ विराजमान हैं, महानदी के किनारे स्थित यह रहस्यमयी मंदिर धार्मिक आस्था, तंत्र साधना और अद्वितीय वास्तुकला का एक अद्भुत संगम है, जो हर साल हजारों नए और पुराने श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है.


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