बस्तर दशहरा: बस्तर दशहरा में जोगी बिठाई की रस्म शुरू, मांग पूरी नहीं हुई तो अगले साल तपस्या नहीं करेंगे दौलत नाग
बस्तर दशहरा: विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं में शामिल जोगी बिठाई की रस्म जगदलपुर के सिरहासार भवन में विधि-विधान के साथ संपन्न हुई. करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत आमाबाल निवासी दौलत कुमार नाग इस साल जोगी के रूप में अगले नौ दिनों तक निर्जल तपस्या करेंगे. मान्यता है कि यह साधना बस्तर दशहरा को शांतिपूर्ण और बिना किसी बाधा के संपन्न कराने की कामना से की जाती है.

तीसरी बार जोगी बनकर साधना कर रहे दौलत नाग
जोगी बिठाई की परंपरा एक पुरानी मान्यता से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि वर्षों पहले दशहरा पर्व के दौरान हल्बा समाज का एक युवक महल के पास नौ दिनों तक निर्जल उपवास रखकर तपस्या करने बैठा था. तत्कालीन महाराज ने जब उससे इसका कारण पूछा, तो युवक ने बताया कि वह बस्तर दशहरा के निर्विघ्न आयोजन की कामना से साधना कर रहा है. इसके बाद सिरहासार भवन का निर्माण कराया गया और यह परंपरा आगे बढ़ती रही. इस वर्ष दौलत कुमार नाग तीसरी बार जोगी बने हैं और मां दंतेश्वरी सहित देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर उन्होंने तपस्या शुरू की.

नौ दिनों तक निर्जल तपस्या करेंगे जोगी
डिप्टी कलेक्टर सी.पी. बघेल ने जोगी बिठाई को बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण रस्म बताया. उन्होंने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी जोगी नौ दिनों तक निर्जल रहकर पर्व के सफल आयोजन की कामना करेंगे. वहीं, जगदलपुर के तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि जोगी बिठाई की रस्म पूरी हो चुकी है और अब अगले नौ दिनों तक साधना जारी रहेगी. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय जनप्रतिनिधि सिरहासार भवन पहुंचे.

हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग का मुद्दा भी उठा
इस बार जोगी बिठाई की रस्म के साथ हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग भी चर्चा में रही. समाज का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद उसकी मांग पूरी नहीं हुई है. तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि समाज की ओर से अपनी समस्या रखी गई है और संबंधित दस्तावेज भी दिखाए गए हैं. उन्होंने कहा कि मामले को शासन स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस संबंध में आगे की प्रक्रिया हो सके.
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मांग पूरी नहीं हुई तो अगले साल रस्म में शामिल नहीं होंगे
जोगी बने दौलत कुमार नाग ने कहा कि वह तीसरी बार इस परंपरा में शामिल हुए हैं और अगले नौ दिनों तक बस्तर दशहरा के निर्विघ्न आयोजन की कामना के साथ तपस्या करेंगे. हालांकि, उन्होंने हल्बा समाज की जाति संबंधी मांग पूरी नहीं होने पर नाराजगी भी जताई. दौलत नाग के मुताबिक, समाज को लंबे समय से आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि यदि मांग पूरी नहीं होती, तो वह अगले साल जोगी बिठाई की रस्म में शामिल नहीं होंगे. अब इस मांग पर शासन की ओर से होने वाली पहल पर नजर रहेगी.


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