CG News: बीजापुर में 35 लाख के 6 इनामी माओवादियों ने किया सरेंडर, AK-47 रखने वाला कैडर भी शामिल
CG News: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को माओवादी विरोधी अभियान के तहत सफलता मिली है. पुलिस के सामने कुल 35 लाख रुपये के इनामी 6 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया है. ये कैडर पश्चिम बस्तर डिवीजन और पड़ोसी राज्य ओडिशा में लंबे समय से सक्रिय बताए जा रहे थे. आत्मसमर्पण के बाद अब इन सभी के मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
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ओडिशा में सक्रिय 4 कैडर भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा में सक्रिय रहे माओवादी कैडर भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, इनमें से 4 कैडर ओडिशा में सक्रिय थे और कंपनी नंबर-08 के साथ शीर्ष माओवादी नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था में भी तैनात रह चुके हैं. इन कैडरों के सरेंडर से दोनों राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आने की संभावना है.
AK-47 रखने वाला कैडर भी शामिल
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में सुक्कू कुड़ियम भी शामिल है, जो ओडिशा राज्य के सीसी स्टाफ का सुरक्षा गार्ड था और उसके पास AK-47 हथियार रहता था. वहीं रानी सोढ़ी उर्फ संध्या वर्ष 2012 से बाल संगम से जुड़ी थी. वह जनवरी में ओडिशा के कोनारी जंगल में हुई मुठभेड़ के दौरान घायल हुई थी. दोनों कैडरों की भूमिका को लेकर पुलिस के पास महत्वपूर्ण जानकारी होने की बात कही गई है.
बड़ी वारदातों में शामिल रहा कोसा माड़वी
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में कोसा माड़वी उर्फ सतीश का नाम भी शामिल है. पुलिस के मुताबिक, वह वर्ष 2006 में हुए एनएमडीसी सीआईएसएफ कैंप हमले और तेकुलगुड़ा कैंप हमले जैसी बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है. इनामी माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, उनके संगठनात्मक नेटवर्क और अन्य गतिविधियों से संबंधित विस्तृत जानकारी आगे की प्रक्रिया में सामने आ सकती है.
पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे
जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों के संपर्क अभियान, बीजापुर में जारी विकास कार्यों और छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास एवं कौशल विकास नीति से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया. इस कदम के बाद अब उनके पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा. पुलिस के लिए यह आत्मसमर्पण पश्चिम बस्तर और ओडिशा से जुड़े माओवादी नेटवर्क की गतिविधियों को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है.

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