मिशन अमृत 2.0: छत्तीसगढ़ में 81 परियोजनाएं स्वीकृत, पेयजल और सीवरेज कार्यों में तेजी के निर्देश
मिशन अमृत 2.0: छत्तीसगढ़ में शहरी क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था, सीवरेज ट्रीटमेंट, जल निकायों के संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए मिशन अमृत 2.0 के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई. मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय हाई पावर स्टेयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित हुई. बैठक में मिशन अमृत 2.0 के तहत स्वीकृत विभिन्न परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई. मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए.
मिशन अमृत 2.0: के तहत 81 परियोजनाएं स्वीकृत
समीक्षा के दौरान सामने आया कि राज्य में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत अब तक कुल 81 परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है. इनमें से 64 परियोजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि 45 परियोजनाओं के कार्य आवंटित हो चुके हैं. वर्तमान में 19 परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया के चरण में हैं. वहीं शेष 11 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR को इसी माह के अंत तक स्वीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है. इससे इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.मिशन अमृत 2.0: पेयजल योजनाओं पर विशेष फोकस
मिशन अमृत 2.0 के तहत पेयजल से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. राज्य में पेयजल आपूर्ति से संबंधित कुल 37 परियोजनाएं स्वीकृत हैं. इनमें से 36 परियोजनाओं के कार्य आवंटित किए जा चुके हैं. बैठक में जगदलपुर की जल प्रदाय योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की प्रशासनिक स्वीकृति को लेकर भी चर्चा हुई. योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जलापूर्ति ढांचे को विकसित करना है.मिशन अमृत 2.0: पांच प्रमुख शहरों में बनेंगे 9 STP
शहरी क्षेत्रों में सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए राज्य के प्रमुख नगरीय निकायों में बड़े पैमाने पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP का निर्माण कराया जा रहा है. अम्बिकापुर, राजनांदगांव, कोरबा, भिलाई और दुर्ग में कुल 9 STP विकसित किए जा रहे हैं. इनकी संयुक्त क्षमता लगभग 333 MLD होगी. इन परियोजनाओं पर करीब 465.82 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. सीवेज के वैज्ञानिक उपचार की व्यवस्था से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है. साथ ही उपचारित जल के बेहतर प्रबंधन से जल स्रोतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है.मिशन अमृत 2.0: चार शहरों में पार्क विकास परियोजनाओं को मिला काम
मिशन अमृत 2.0 के तहत केवल पेयजल और सीवरेज ही नहीं, बल्कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. इसी दिशा में पिछले एक महीने के दौरान बिलासपुर, मुंगेली, कांकेर और अहिवारा में चार पार्क विकास परियोजनाओं के कार्य आवंटित किए गए हैं. शहरी क्षेत्रों में पार्क और हरित क्षेत्र विकसित होने से नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध होंगे. इसके साथ ही शहरों में पर्यावरणीय संतुलन और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में भी ऐसे प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.GIS आधारित मास्टर प्लान को लेकर भी समीक्षा
बैठक में अमृत शहरों के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार करने से संबंधित उप-योजना पर भी चर्चा हुई. इसके तहत तैयार किए गए संशोधित स्टेट एक्शन प्लान के अनुमोदन की स्थिति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. GIS आधारित योजना से शहरों के विकास को अधिक व्यवस्थित और डेटा आधारित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. शहरी अधोसंरचना, भूमि उपयोग और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकास की बेहतर योजना तैयार करना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है.गुणवत्ता और समय-सीमा पर मुख्य सचिव का जोर
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं को केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी उच्च स्तर की होनी चाहिए. उन्होंने परियोजनाओं की नियमित निगरानी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया. पेयजल, सीवरेज, जल निकायों और पार्क विकास जैसी परियोजनाएं सीधे आम नागरिकों की सुविधाओं और शहरों के पर्यावरण से जुड़ी हैं. ऐसे में इनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए.बैठक में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
राज्य स्तरीय हाई पावर स्टेयरिंग कमेटी की बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास, वित्त, जल संसाधन, आवास एवं पर्यावरण और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया. भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े.मिशन अमृत 2.0 से शहरों में क्या बदलेगा?
मिशन अमृत 2.0 का फोकस शहरी नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है. छत्तीसगढ़ में स्वीकृत परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कई शहरों में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज प्रबंधन, जल निकायों के संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है.- पेयजल: शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर.
- सीवरेज: प्रमुख शहरों में STP के जरिए सीवेज उपचार की क्षमता बढ़ाई जाएगी.
- हरित क्षेत्र: नए पार्कों के विकास के जरिए शहरों में ग्रीन स्पेस बढ़ाने की पहल.
- जल निकाय: जल स्रोतों के पुनरुद्धार और संरक्षण से संबंधित परियोजनाओं पर काम.
- स्मार्ट प्लानिंग: GIS आधारित मास्टर प्लान के जरिए शहरी विकास को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास.
